Monday, November 29, 2010

राडिया, मीडिया और मंडियां

      सत्ता के गलियारों  से लेकर कार्पोरेट सेक्टर के अलंबरदारों और  मीडिया के पहरेदारों को अपनी सुरतालों पर ताता-थैया करानेवाली नीरा  राडिया नामक दुर्लभ प्रजाति  की  महिला ने अपने  नाम और काम  की व्यापकता साबित करते  हुए जागरूक मीडिया  सहित सरकार,  नौकरशाह  और औद्योगिक  घरानों  के कथित  प्रतिष्ठित  और  नामधारी लोगों को भ्रष्टाचार  की  गंगोत्री  में डूबाने का पुख्ता  इंतजाम  करवा  लिया  है | राडिया  का काम था  औद्योगिक  घरानों / कम्पनियों का काम सरकार अथवा  नौकरशाहों  से  करवाना और लगे हाथ  वक्त  जरूरत अपनी  मनवाने  के लिए  मीडिया के द्वारा उन पर  दबाव बनवाना | इस तरह  एक महिला  दलाल ने मंत्री से लेकर नौकरशाह और मीडिया से लेकर कार्पोरेट सेक्टर तक को भी दलाली के दलदल में फांस दिया है | सीबीआई के पास इस तरह के वार्ताओं के लगभग ५८५१ रिकार्ड हैं | जिसमें से एक समाचार पत्रिका ने केवल सौ वार्ता टेप रिकार्डिंग की बात ही सार्वजनिक की है | इस बीच टाटा उद्योग समूह के सर्वेसर्वा रतन टाटा ने अपनी निजता की गुहार लगाते हुए सुप्रीमकोर्ट तक जाने का मन बना लिया है | क्योकि उनका मानना है कि टेपिंग गैरकानूनी ढंग से लीक हुयी  है | जिससे उनके अपनी जिन्दगी जीने के अधिकारों का हनन हुआ है | खैर कार्पोरेट सेक्टरों, सरकारों व नौकरशाहों में तो इस तरह की लुका-छिपी और चोर-सिपाही का खेल वर्षों से खेला जा रहा है | लेकिन इस हमाम में नंगी मीडिया का नंगापन सही ढंग से हमाम के बाहर तमाम हुआ है | पेड न्यूज के सहारे पेट भरने वाले अधिकतर मीडिया के चर्बीदार , हाईफाई लोग "बेस्ट क्वालिटी " की दलाली तो दशकों से गाहे- बगाहे  करते रहे हैं | लेकिन इन दिनों इनकी संख्या में कुछ ज्यादा ही इजाफा हो गया है | जनता को नैतिकता और आदर्शों का पोलियो ड्राप पिलाने वाले मीडिया के लोगों की मानसिक विकलांगता किसी भी प्रेस क्लब में लेट नाईट देखी जा सकती है | जब बोतल अन्दर जाती है तब इन नामधारी   सुसंस्कृत महाविद्वानों का आदर्श और नैतिक आवरण तार- तार होकर बाहर आने लगता है | हो सकता है कि अपने बचाव की दलील  में मीडिया वाले उस पर अपनी निजता का लेबल चस्पा कर दें | तो निजता क्या केवल मीडिया वालों की ही होती है ? फिर दूसरे लोगों की निजता को उधेड़ने का मीडिया को क्या हक़ है ? मुझे इस बाबत  एक  पुलिस वाले का एक मौलाना के लिए कहा गया वो  शेर याद आ रहा है |
       ये कैसा इन्साफ है , ऐ हजरते मौलाना |
      हम लें तो घूस और आप ले तो नजराना ||
अंत में यहाँ साफ़ तौर पर यह कहा जा सकता है कि अपने संवाद व संप्रेषण हेतु 5 डब्ल्यू ह्वाट, ह्वेन,व्हेयर, हू और ह्वाई से शुरू होने वाली मीडिया अब  3 डब्ल्यू यानी वूमेन, वाइन और वेल्थ में अटक कर रह गयी है |
                             मुनीर अहमद मोमिन
    

1 comment:

  1. haan ji ab toh money, women aur wine ki hi game hai ji.

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