Tuesday, November 23, 2010

छिड़ना मुंबईवाली का दिल्ली में

    महिला राष्ट्रपति वाले देश और महिला ही मुख्यमंत्री वाले प्रदेश की राजधानी दिल्ली में गुल पनाग छिड़ क्या गयी  मीडिया ने इसे लेकर वैचारिक सर्वे और प्रतिक्रियाओं की शाब्दिक जंग ही छेड़ दी | इलेक्ट्रानिक मीडिया ने तरह-तरह के विश्लेषणों के जरिये भारतीय  जनता को जबरन अपनी  समझ  ड्राप पिलाना शुरू कर दिया | कि दिल्ली से मुंबई कैसे अच्छी है | क्योकि मुंबई में लडकियों के छिड़ने का कोई खतरा नही रहता | जबकि दिल्ली में छेड़ने वाले छेड़कर ही छोड़ते हैं | 
    भाई, छिड़ना,छेड़ना यह कोई भौगोलिक, नागरी, प्रांतीय  अथवा देशीय प्रवृत्ति  नही होती | बल्कि यह एक सहज विपरीत लिंगी  रूग्ण मानसिक प्रवृत्ति  होती है | इसलिए इस प्रवृत्ति के लोग जहां भी रहेंगे छेड़ने-छिडाने का काम होता ही रहेगा | चाहे दिल्ली हो या मुंबई, पंजाब हो या कश्मीर, कोलकाता हो या पटना, राजस्थान हो या गुजरात, लखनऊ हो या बंगलूरु या हैदराबाद | इस तरह के "छेडू जीव "  हर जगह पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं | और इस तरह की देश में हजारों घटनाएँ प्रतिदिन घटती हैं | लेकिन छिड़ना उन्ही का पानीपत के युद्ध के माफिक ऐतिहासिक हो जाता है जो कथित तौर पर सेलीब्रेटी होते है | उनके  छिड़ते ही परम  जागरूक  मीडिया  सहित समाज सेवकों यहाँ तक कि राजनेताओं में भी तर्क-कुतर्क-वितर्क-सतर्क की जंग छिड़ जाती है | यदि किसी भाजपा शासित प्रदेश में कोई महिला छिड़ती है तो कांग्रेसी कहते है कि भाजपा के शासन में महिलाएं महफूज नही | यही कारनामा कांग्रेसी राज में हो तो भाजपा कांग्रेस राज में नारियों को असुरक्षित बताने लगती है | इस तरह गुल पनाग दिल्ली में छिड़ने वाली कोई प्रथम भरतीय महिला या मुंबई वासी नही हैं | स्मृता ईरानी को भी लोकसभा के चुनाव में पर्चा दाखिला के दौरान किसी ने जबर्दस्त छेड़ दिया था | तब इल्जाम दिल्ली के युवा कांग्रेसियों पर आया था |
                                                
                                                                           मुनीर अहमद मोमिन            

1 comment:

  1. muneer bhai gul panag dehli ki hi hain, unke liye aam baat hai

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