Tuesday, November 16, 2010

राखी माता की जय हो

        आप आश्चर्य में पड़ गए होंगे कि  राखी और माता यह परम विरोधीवाची शब्द एक साथ कैसे तो भाई वह यूं कि दो ही माता को बलि पसंद है | एक सनातन कालीन कालीमाता और अब कलियुगी नईनवेली राखी माता भी बलि लेने लगी है | इस क्रम में  लक्ष्मणप्रसाद अहिरवार नामक एक २५ वर्षीय युवक का "नामर्द" नामक शाब्दिक हथियार से बलि ले लिया | यह बात हम नही बल्कि उत्तरप्रदेश के एक पुलिसथाने में दर्ज रपट और मध्यप्रदेश के इंदौर की अदालत में दायर एक याचिका कहती है | अब लाख टके की बात यह है कि राखी ने किस अनुभव या जांच पड़ताल की बिना पर मृतक युवक को नामर्द बताया यह बात अब तक रहस्य बना हुआ है | वैसे राखी सावंत की भाव भंगिमाएं अपने सबसे तेज चैनल वाले आज तक के सीधी-बात के नाम पर टेढ़ी बात करने वाले श्रीयुत प्रभु चावला जी अथवा आपकी अदालत वाले सम्मानीय रजत शर्मा जी को भले भाती हो लेकिन अभिषेक अवस्थी जैसे निरीह जीवों को यह मर्दमार महिला खौफजदा ही करती रहती है | नख से शिख तक नारी स्वतन्त्रता की पुरजोर पैरोकार राखी सावंत के डांस की थिरकनो और दलदल में फंसी भैंस की छटपटाहट में हम जैसे मोटी अक्ल वाले लोगों को कोई ख़ास अंतर नजर नही आता | दर असल राखी के नाम पर अग्नि मिसाइल की तरह काम करने वाली राखी किसी भी एंगल से राखी नही लगती | जबकि भारतीय सनातन परंपरा ने राखी को विशेष महत्व प्रदान कर रखा है | इस नाम का त्यौहार जहां भाई -बहनों के लिए विश्व प्रसिद्ध है वहीं अपने पुरखों का पवित्र नदियों में राखी प्रवाह भी एक परम श्रद्धेय अनुष्ठान है | इतना ही नही उत्तर भारतीय व्यंजनों में भौरी( बाटी ) जो राखी में सेंकी जाती है उसके लज्जत का कोई जवाब नही | अंत में चलते-चलते फ़िल्मी दुनिया के ढलान की ओर ढली एक और राखी को भी गुलजार करना चाहता हूँ | किसी जमाने में गुलजार साहेब की शरीके हयात रहीं राखी ने उस समय बोस्की का निर्माण किया था जब भिवंडी के पावरलूम उद्योग में बोस्की के बजाय केवल काटन,टू बाई टू और सिल्क के ही कपड़े तैयार होते थे | राखी जी जब तक गुलजार साहेब के सानिध्य में थी तब तक उन्होंने अपने को केवल राखी नाम तक ही सीमित रखा | लेकिन गुलजार साहेब से अलग होते ही वे राखी गुलजार लिखने लगी थी | 
                                                       मुनीर अहमद मोमिन                     

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