Monday, November 22, 2010

राजयोग बनाम सत्ताभोग

                                                        माया मिले न राम
शीतकाल शुरू होते ही इन दिनों राम और माया में ठना शीत युद्ध अब राजनैतिक अखाडा की शक्ल अख्तियार करते जा रहा है | बात यहाँ योग गुरू बाबा रामदेव उर्फ़ रामकिसन यादव और उत्तर-प्रदेश की चिरकुवांरी  मुख्यमंत्री बहन मायावती की चल रही है | माया-राम में तनातनी की गांठ पिछले १७ मार्च को बसपा की २५वी  वर्षगांठ पर होने वाले एक समारोह में पडी थी | जिसमें  सुश्री  मायावती ने  बिना राम का नाम लिए कहा था कि एक बाबा है जो लोगों को कसरत सिखाता  है तथा राजनीति में भी आना चाहता  है | बस तब से लेकर योग वाले रामदेव से सत्ताभोग वाली मायावती में छत्तीस  का आंकड़ा  बना  है | वैसे  किसी  महिला  से बाबा रामदेव का यह  कोई पहला  पंगा  नहीं  है  | ऐसे प्रसंग  का शुभारम्भ  सबसे  पहले  अपने  कामरेड  प्रकाश  करात की लाल बिंदी वाली लुगाई  सांसद वृंदा  करात से हुई  | फिर  "चरित्रता "  के  मामले में संभावना  सेठ  आदि  जैसी  अत्याधुनिक  जगत  की महिलाओं  ने भी बाबा पर आँखें  तरेरा था | बाबा रामदेव अपने साथ  देश  की सौ  करोंड़ जनता  होने का दावा  करते हैं | उन्होंने  योग शिविर के माध्यम  से भ्रष्टाचार  के खिलाफ  भी अभियान  छेड़  रखा है | इसलिए  २१ नवंबर  को जिला प्रशासन  ने उत्तर-प्रदेश के महाराजगंज  में बाबा रामदेव के योग शिविर पर रोक लगा   दिया | उखाड़-पछाड़  की राजनीति की सिद्धहस्त  मायावती  ने एक तो यह भांप  लिया  है  कि निकट  भविष्य  में  यह बाबा उनके राह  में बांधा बन  सकता  है | दूसरे मायावती बाबा को रामदेव न मानकर  यादव कुनबा  से जोड़कर  इन्हें  मुलायम  यादव और लालू यादव की श्रेणी  में डालकर  देख  रहीं  हैं | और यादवी  राजनीति से मायावती की राजनैतिक दुश्मनी  और खुन्नस  जग  जाहिर  है | संभावित  तौर  पर यदि  उत्तर-प्रदेश में बाबा रामदेव  और मुलायम इकट्ठा हो गए  तो बहन जी  के हाथी  की हालत  पतली  होना  अवश्यंभावी है |  निःसंदेह  बाबा रामदेव के योग शिविर से बहुसंख्य लोग  लाभान्वित  हुए  हैं  और उनसे  काफी  लोग जुड़े  हैं | लेकिन कोई  जरूरी  नहीं कि योगों  का आसन  बाबा को राजनैतिक सिंहासन  दिला  ही दे | क्योंकि  भारत  की जनता का अजीबो-गरीब  स्वभाव  है | वह  जिस  गति  से सर पर बिठाना  जानती  है, उससे  द्रुतगति  से पैरों  तले रौंदना  भी जानती है |
                                                                                                                 मुनीर  अहमद  मोमिन
      

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