उद्योगपति रतन टाटा ने रिश्वत मांगने का आरोप ऐसे समय पेश किया है , जब भारतीय संसद में २ जी स्पेक्ट्रम भ्रष्टाचार के तार झनझना रहें हैं | एक दशक बाद अपनी लम्बी चुप्पी तोड़ने वाले टाटा ने यही मौका क्यों चुना ये भी शोध का विषय हो सकता है| अभी पिछले पखवाड़े अमेरिकी राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा एवं उनकी लुगाई द्वारा ममता दीदी की आँखों में खटकने वाली अपने नैनो की तारीफ से गदगदाए टाटा ने आरोप का ऐसा गदा घुमाया है कि कई राजनेता चकरघिन्नी बन गए हैं| इसमें पूर्व नागरिक उड्डयन मंत्री सी.एम.इब्राहिम ने तो "घूसमंगता मंत्री" का नाम सार्वजनिक न करने पर आत्महत्या करने तक की धमकी दे डाला है| वहीं टाटा के चांटा से भाजपा में भी हलचल मच गयी है| सिंगापुर एयर लाइन्स के साथ मिलकर भारत में अपनी एयर लाइन्स शुरू करने का जो प्रस्ताव १९९० के दशक में टाटा ने केंद्र सरकार को दिया था| उस समय केंद्र में अटल विहारी वाजपेयी की सरकार थी और उड्डयन मंत्री अनंत कुमार तथा घोषित सूचना प्रसारण मंत्री एवं अघोषित फंड मैनेजर स्व. प्रमोद महाजन थे| इसके बाद १९९६ में केंद्र में घोर निद्रा पुरूष एच.डी.देवगौड़ा की सरकार थी| जिसमें सी.एम.इब्राहिम नागरिक उड्डयन मंत्री थे| इसमें कांग्रेस के लिए ये राहत की बात है कि उस वक्त केंद्र में गैर कांग्रेसी सरकार थी| मौजूदा समय में देश के सभी प्रान्तों सहित केंद्र में भी भ्रष्टाचार की ज्वालामुखी धधक रही है| इसलिए भ्रष्टाचार के खिलाफ मुखर हो रहे रामकिसन यादव उर्फ़ बाबा रामदेव ने अपने लिए जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा मांगी है| पेट फुलाने पचकाने के योग में माहिर बाबा रामदेव के भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम से जहाँ भ्रष्टाचारी अपने पेट में लात लगने से आशंकित होकर पिचक रहे हैं| वहीं बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के भी पेट में मरोड़ हो रहा है| जिनके खिलाफ उनकी भारत स्वाभिमान संस्था ने अभियान छेड़ रखा है
मुनीर अहमद मोमिन
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