Sunday, January 30, 2011

be lagam: आखिर दर्ज हो ही गया आदर्श एफआईआर

be lagam: आखिर दर्ज हो ही गया आदर्श एफआईआर: " बड़ी मछलियाँ अभी भी जाल से..."

आखिर दर्ज हो ही गया आदर्श एफआईआर

                   बड़ी मछलियाँ अभी भी जाल से बाहर
आखिरकार देश भर में बहु चर्चित व विवादास्पद मुंबई के आदर्श हाउसिंग घोटाला काण्ड में पूर्व मुख्य मंत्री अशोक चव्हाण सहित १२ लोगों के खिलाफ सीबीआई ने प्राथमिकी दर्ज कर ही लिया | इस प्राथमिकी में तीन आईएएस, एक आईपीएस और सेना के चार बड़े अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं | इसमें पूर्व मेजर जनरल एम.एम. वांगचू , आर.सी. ठाकुर व विधायक कन्हैयालाल गिडवानी को मुख्य साजिश कर्ता बनाया गया है | इन सबके खिलाफ भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी व अपराधिक षड्यंत्रों के मामलों में धारा ४२०, ४६८, ४७१, १२० बी व १३ ए के तहत केस दर्ज किया गया है | अन्य आरोपियों में आई.ए.कुंदन, रामानन्द  तिवारी, सुभाष लाला, पी, वी. देशमुख, प्रदीप व्यास आदि शामिल हैं | इस बाबत आदर्श मामले में याचिका कर्ता रहे वाई.पी.सिंह का कहना है कि इस एफआईआर में कम से कम ५० लोगों का नाम होना चाहिए था | आदर्श घोटाले के मुख्य सूत्रधार विलासराव देशमुख, सुशीलकुमार शिंदे और अशोक चव्हाण तीनो है | लेकिन सुप्रीम कोर्ट की लताड़ और दस लाख के आर्थिक दंड के बावजूद जिस तरह से केन्द्रीय मन्त्रिमन्डल में विलासराव देशमुख को  ग्रामीण विकास मंत्रालय देकर उनका कद बढाया गया है | इससे यही संकेत मिलता है कि एफआईआर में उनका नाम नही होगा | कुछ इसी तरह की प्रतिक्रिया महाराष्ट्र विधान सभा में विपक्ष के नेता एकनाथ खडसे की भी है | उनका भी यही कहना है कि एफआईआर में विलासराव देशमुख और सुशीलकुमार शिंदे का नाम क्यों नही है | जबकि देशमुख एवं शिंदे के ही कार्यकाल में आदर्श सोसायटी से संबंधित  अनुमति दी गयी थी | इस लिए एफआईआर में उनका नाम यदि नही भी है तो अवश्य शामिल किया जाना चाहिए | सूत्रों का दावा है कि मामला दर्ज करने का फैसला सबूतों पर कानूनी राय लिए जाने के बाद लिया गया | आदर्श मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ती बी.एच. मारलापले और यू.डी. सालवी की खंडपीठ ने सीबीआई से पूंछा था कि आपने मामला दर्ज क्यों नही किया | कोलाबा के नजदीक बनी इस इमारत में सेना के दो पूर्व प्रमुख जनरल दीपक कपूर और जनरल एन.सी.विज और पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल माधवेन्द्र सिंह के भी फ़्लैट हैं | हालांकि इन पूर्व प्रमुखों ने दावा किया है कि उन्होंने फ़्लैट लौटा दिए हैं | 
       
                                                मुनीर अहमद मोमिन

Tuesday, January 25, 2011

be lagam: रशीद ताहिर के प्रयास से धामनकरनाका कब्रिस्तान का न...

be lagam: रशीद ताहिर के प्रयास से धामनकरनाका कब्रिस्तान का न...: " रशीद की गुगली : आउट हुए टावरे और दलवी भिवंडी के विधायक रशीद ताहिर के अथक प्रयास से इसी २७ जनवरी को ठाणे जिला भू..."

रशीद ताहिर के प्रयास से धामनकरनाका कब्रिस्तान का निदान


 रशीद की गुगली : आउट हुए टावरे और दलवी 
भिवंडी के विधायक रशीद ताहिर के अथक प्रयास से इसी २७ जनवरी को ठाणे जिला भूसंपादन विभाग द्वारा भिवंडी मनपा को धामनकरनाका कब्रिस्तान की जमीन का  हस्तांतरण कर दिया जाएगा | जिससे भिवंडी के एक बहुत बड़े मुस्लिम आबादी वाले धामनकरनाका इलाके में वर्षों से चली आ रही कब्रिस्तान की समस्या का अब समुचित निदान हो जाएगा |
     मालूम हो कि धामनकरनाका से लेकर अंजूरफाटा इलाके तक  कोई भी  कब्रिस्तान  न होने के कारण यहाँ के मुसलमान समुदाय के लोगों को मय्यत लेकर लगभग पाँच किमी दूर भुसार मोहल्ला जाना पड़ता था | जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता था | जिसके कारण २००३ से ही कब्रिस्तान की माँग जोर पकड़ने लगी थी | उस समय यहाँ के लोगों ने मनपा मुख्यालय पर एक ऐतिहासिक मोर्चा निकालकर सर्वे नं. ३१० पर कब्रिस्तान बनाने की माँग मनपा आयुक्त से की थी | उस मोर्चे में शामिल लोंगों को तत्कालीन विधायक अब्दुल रशीद ताहिर मोमिन ने जहाँ उक्त जमीन को कब्रिस्तान के लिए आरक्षित करवाने  के लिए राज्य सरकार से जी.आर. निकलवाने का आश्वासन दिया था | वहीं अब के सांसद और तब के मेयर सुरेश टावरे ने मोर्चे में शामिल लोगों को भरोसा दिलाया था कि सर्वे नं. ३१० में स्वयं उनका पावरलूम कारखाना है | यदि राज्य सरकार उस जमीन को कब्रिस्तान के लिए आरक्षित करती है तो वह सबसे पहले अपना कारखाना तोड़ देंगे | विधायक रशीद ताहिर मोमिन ने एक महीने के अंदर ही सर्वे नं. ३१० को कब्रिस्तान के लिए आरक्षित करवाने का अपना वादा तो पूरा कर दिया | लेकिन सुरेश टावरे ने अपनी ज़मीन बचाने के लिए वहां के कुछ अन्य लोंगों के साथ उच्च न्यायालय से स्टे ले लिया जिसका खामियाजा भी उन्हें मनपा के चुनाव में अपनी ज़मानत जप्त कराकर भुगतना पड़ा | तब से यह मामला राजनैतिक रूप लेकर ठंडे बसते में चला गया |  सुरेश टावरे के कारण साईट नंबर ३१० का मामला कोर्ट-कचहरी में फंस जाने के कारण ठप्प पड़ गया | 
     सुरेश टावरे के कारण मामला हाईकोर्ट में चले जाने के बाद में  मनपा ने कब्रिस्तान की जमीन के लिए सर्वे नं ३०७ के आरक्षण के लिए प्रस्ताव पास कर उसकी राज्य सरकार से मंजूरी भी ले लिया था | फिर भी मामला आगे नही बढ़ पाया | लेकिन दुबारा विधायक चुने जाने पर रशीद ताहिर मोमिन ने कब्रिस्तान के जमीन के प्रकरण को फिर आगे बढाया | यहाँ इस बात का उल्लेख आवश्यक है कि २००९ के विधानसभा चुनाव के ऐन पहले भिवंडी के तत्कालीन महापौर और विधान सभा के कांग्रेस के प्रत्याशी  जावेद दलवी ने वोट की राजनीति और मौका परस्ती का नमूना पेश करते हुए आनन-फानन में कब्रिस्तान के रास्ते का भूमिपूजन कराया था | लेकिन आज तक वह  रास्ता भी नही बन पाया | कब्रिस्तान के रास्ते में आ रही नई-नई बाधाओं के बावजूद विधायक रशीद ताहिर मोमिन ने फरवरी २०१० में कब्रिस्तान की जमीन के अधिग्रहण का रास्ता साफ करवा दिया | लेकिन फिर इसी बीच राजस्व विभाग के अधिकारियों की मिली भगत से एक स्थानी व्यक्ति ने सात-बारह पर पेंसिल से अपना नाम दर्ज कराकर मामले को उलझा दिया था | जिससे पुनः यह मामला अधर में लटक गया था | लेकिन २८ दिसंबर २०१० को विधायक रशीद ताहिर मोमिन ने मनपा आयुक्त सहित उससे सम्बंधित अधिकारियों के साथ बैठक करके इस काम में प्रगति लाने का काम फिर शुरू कर दिया | उन्होंने राजस्व विभाग के अधिकारियों द्वारा पेंसिल से नाम चढाये जाने के सम्बन्ध  में जब तहसीलदार से स्पष्टीकरण माँगा | जिसके फलस्वरूप ३० दिसंबर को ठाणे जिलाधिकारी कार्यालय में हुई एक बैठक हुई जिसमें विधायक श्री मोमिन सहित भिवंडी मनपा और और राजस्व विभाग के अधिकारी शामिल थे | इस बैठक में भिवंडी के तहसीलदार ने अपना स्पष्टीकरण देकर उक्त ज़मीन को तुरंत कब्रिस्तान के लिए अधिग्रहित करने का सुझाव दिया | आखिरकार विधायक मोमिन की कोशिश रंग लाई और ठाणे के विशेष भूसंपादन अधिकारी ने भिवंडी के मनपा आयुक्त को पत्र लिखकर सूचित किया है कि २७ जनवरी को कब्रिस्तान की जमीन का कब्ज़ा भिवंडी मनपा को दे दिया जाएगा | इसलिए इस जमीन का कब्जा लेने के लिए भिवंडी मनपा के प्रतिनिधि का रहना आवश्यक है | अब कब्रिस्तान की जमीन का कब्जा भिवंडी मनपा को मिल जायगा और यह जगह दफन के काम में आने लगेगी | विधायक रशीद ताहिर मोमिन के इस सराहनीय काम को अंजाम तक पहुंचाने के लिए भिवंडी शहर के  तमाम  सामाजिक और  मुस्लिम समुदाय के संगठनों ने उन्हें  बधाई दी है |  
                                                                                                  
                            मुनीर अहमद मोमिन .        

Saturday, January 15, 2011

be lagam: मीडिया पर भी सूचना के अधिकार की जरूरत

be lagam: मीडिया पर भी सूचना के अधिकार की जरूरत: " किन अदृश्य शक्तियों के नियंत्रण में है मीडिया ?इंडियन एक्सप्रेस समूह के मुंबई से प्रकाशित मराठी दैनिक&..."

मीडिया पर भी सूचना के अधिकार की जरूरत

  किन अदृश्य शक्तियों के नियंत्रण में है मीडिया ?
इंडियन एक्सप्रेस समूह के मुंबई से प्रकाशित मराठी दैनिक लोकसत्ता के कार्यकारी संपादक गिरीश कुबेर ने पत्रकारों को भी सूचना के अधिकार के परिधि में लाने की बात कहकर मीडिया जगत में  एक बहस का नया मुद्दा छेड़ दिया है | एक सार्वजनिक कार्यक्रम में श्री कुबेर ने जमकर मीडिया की ऐसी-तैसी कर दी | जिससे 'पत्रकारनुमा दलालों' और 'दलालनुमा' पत्रकारों के बीच खदबदाहट मच गयी है | अपनी विकलांग/एकांग वैचारिक सोचों  को लोगों पर जबरन थोपने वाले मीडिया के महारथी आखिर अपने गिरेबान में कब झाकेंगे ? विभिन्न राजनैतिक पार्टियों और कार्पोरेट सेक्टर के असरदारों के पे-रोल पर काम करने वाले 'धंधेबाज पत्रकार' सुपारी लेकर या तो किसी की राजनैतिक/सामाजिक हत्या कर देते हैं या चीरहरण | सच तो यह है कि मीडिया कंपनियों में रखैल सरीखा भूमिका अदा करने वाले पत्रकारों को कार्पोरेट सेक्टर और बाज़ार  के धन्नासेठ पूरी तरह नियंत्रित कर रहे हैं |
      मै यह नही कहता कि यह हालत किसी विशेष शहर या देश की है | बल्कि विश्व स्तर पर पत्रकारिता स्तरहीन और चरित्रहीन हुई है | नही तो अदना विकिलिक्स जैसा इंटरनेट माध्यम विश्व के सबसे उदंड और जगत दादा अमेरिका सहित अनेक देशों की राजनैतिक चूलें हिला सकता है | तो इतनी बड़ी लहीम-सहीम मीडिया क्यों नही ? राडिया टेप पिछले लगभग दस माह से कई मीडिया स्टेशनों से गुजरा | लेकिन किसी ने उस पर तवज्जो नहीं दी | एक पत्रिका में उसके कुछ अंश छपने के बाद ही मीडिया जगत सियारों की तरह हुआं-हुआं करने लगा | कृषि एवं गाँव प्रधान भारत की मीडिया विश्व सुंदरियों, नचनियों/गवइयों (फिल्म जगत ) और क्रिकेट आदि में ही आखिर क्यों अपनी पूरी ऊर्जा खपा दे रही  है | आज खेती/खेतिहर और गंवई सरोकार वाली पत्रकारिता कितनी फीसदी हो रही है ? इतना ही नही आज कल खबरों से 'तटस्थता' क्यों लुप्त हो गई है ? महाराष्ट्र का आदर्श घोटाला उसी वक्त बाहर क्यों आया जब दो बड़े ठेकेदारों के बीच तना-तनी हुई | जिसमें एक वर्तमान मुख्यमंत्री का ख़ास था तो दूसरा पूर्व का | फिर पूर्व मुख्यमंत्री ने मीडिया में 'आदर्श' सुपारी देकर वर्तमान मुख्यमंत्री को भी पूर्व बना दिया | इसका खुलासा खुद वर्तमान से पूर्व बने मुख्यमंत्री ने एक सार्वजनिक सभा में डंके की चोट पर किया | आज मीडिया को दूसरों पर चर्चा-परिचर्चा, संवाद-परिसंवाद करने/करवाने से पहले, अपने स्वयं के आत्ममंथन और आत्मचिंतन की घोर आवश्यकता है | क्योंकि आज कल "पेड न्यूज" का 'कैंसर' पत्रकारिता की विश्वासनीयता और आचरण को पूरी तरह लीलता जा रहा है | हो सकता है कि, बहुत सारे या सारे के सारे लोग मेरे विचारों से असहमत हों | लेकिन मुझे भी पत्रकारिता का कमोबेश तीस वर्षों का तजुर्बा है | किसी को बुरा लगे या भला | लेकिन -
    मै आईना हूँ दिखाऊँगा दाग चेहरे का,
    जिसे  पसंद न हो  सामने  से हट जाए | 
                                                                  मुनीर अहमद मोमिन               

Friday, January 14, 2011

be lagam: शीला की चप्पल

be lagam: शीला की चप्पल: "............ और जब भाग ली पत्रकार मंडली देश में तीसमार खां फिल्म के गाना शीला की जवानी पर प्रिंट मीडिया वालों की खूब कलम घसीटी व इलेक..."

शीला की चप्पल

............ और जब भाग ली पत्रकार मंडली
 देश में तीसमार खां फिल्म के गाना शीला की जवानी पर प्रिंट मीडिया वालों की खूब कलम घसीटी व इलेक्ट्रानिक मीडिया के गाल बजौव्वल करने वाले पत्रकारों को परसों शीला का एक नया रौद्र रूप देखने को मिला | जब महाराष्ट्र सरकार के शिक्षा विभाग की रिटायर्ड शिक्षाधिकारी शीला तिवारी ने पत्रकारों को चप्पल निकालकर दौड़ा लिया | लेकिन इसके बावजूद 'निर्लज्ज्म सदा सुखी' को चरितार्थ करते हुए इन परम बेहया पत्रकार मंडली ने गाडी में जा बैठे पति- पत्नि से पुनः उनकी प्रतिक्रिया जाननी चाही , तो शीला जी ने दोबारा उनके स्वागत में अपना चप्पल लहराया | जबकि इस दौरान उनके पति रामानन्द तिवारी उन्हें ऐसा न करने के लिए दिल से रोकते दिखाई दिए | यह घटना देखने में भले ही आपको अट-पटी लगे लेकिन मैं शीला तिवारी के इस आचरण से लगभग सहमत सा हूँ | क्योंकि शीला तिवारी नामक यह महिला कोई जाहिल या गवांर नही, बल्कि एक कुलीन घराने से ताल्लुक  रखती हैं | जो शिक्षा विभाग के उपनिदेशक पद से हाल ही में रिटायर्ड हुई हैं | वे उन आईएएस रामानन्द तिवारी की धर्मपत्नी हैं जिन्हें आदर्श बिल्डिंग  घोटाला में लटकाया गया है | चूंकि शीला जी एक सुशिक्षित व संवेदनशील महिला हैं, इसलिए उन्हें इस बात का पूरा भान है कि उनके पति "मीडिया ट्रायल" के शिकार हुए हैं | इसलिए मीडिया वालों पर उनका यह गुस्सा  भले ही असभ्यता की परिधि में आता हो, लेकिन यह एक सहज मानव प्रक्रिया भी है |
रामानंद तिवारी को आदर्श मामले में लपेटने को बेताब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वी बाबा भी तो राज्यसभा के चुनाव के नामांकन के दौरान अपनी संपत्ति के सन्दर्भ में गलत हलफनामा पेश करने के साथ-साथ अति पिछड़े वर्ग के कोटे से दीन-हीन बनकर मुंबई में एक फ़्लैट हथियाया है | मै रामानन्द तिवारी को बहुत करीब से जानता हूँ | लगभग एक दशक तक लगातार राज्य सरकार के सबसे मलाईदार विभाग नगर विकास का सचिव / प्रधान सचिव रह चुकने के बाद उनकी छवि  एक इमानदार नौकरशाह की रही है | लेकिन दुर्भाग्यवश  एक छोटी सी गलती (पुत्रमोह) के कारण उनकी बुढौती खराब हो गयी | रामानन्द तिवारी छोटी मछली थे , जिन्हें फांसना आसान था , और वे फंस भी गए एक अन्य आईएएस  सुभाष लाला के साथ | इसके विपरीत रत्नाकर गायकवाड भी इस मामले में ढंग से हिचकोले खाने के बाद भी प्रमोट  होकर सीधे राज्य के मुख्यसचिव बन गए | अशोक चव्हाण को छोड़कर इस घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री और मंत्री अभी तक गुलछर्रे उड़ा रहे हैं | ऐसे में रामानन्द तिवारी की पत्नी या उनके परिजन 'एकांगी' सोच वाले मीडिया के चिल्लरों का चप्पल से स्वागत करना चाहते हैं तो किसी के लिए चौकाने वाली बात नही होनी चाहिए | 
                                                                      मुनीर अहमद मोमिन       

Thursday, January 13, 2011

be lagam: व्यवसायिक कत्लखाना बन गया है भिवंडी का जकातनाका

be lagam: व्यवसायिक कत्लखाना बन गया है भिवंडी का जकातनाका: "सरकार को अपने जेब में रखती है जकात ठेका कंपनी महाराष्ट्र राज्य सरकार को अपने जेब में रखने ..."

व्यवसायिक कत्लखाना बन गया है भिवंडी का जकातनाका








सरकार को अपने जेब में रखती है जकात ठेका कंपनी
  
महाराष्ट्र  राज्य सरकार को अपने जेब में रखने वाली  भिवंडी मनपा की चुंगी ठेकेदार कंपनी ' कोणार्क इन्फ्रास्ट्रक्चर ' की धांधलियों, गुंडागर्दी और मनमानी वसूली के खिलाफ राज्य के मुख्यमंत्री सहित अन्य संबंधित अधिकारियों से हस्तक्षेप करने की माँग की गयी है |
   श्रीसती इंटरप्राइजेज के मालिक नितेश अग्रवाल ने राज्य के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण और नगर विकास विकास सचिव सहित अन्य सम्बंधित अधिकारियों को भेजे गये ज्ञापन में कोणार्क की दबंगई से मनमानी चुंगी वसूली का दस्तावेजी सबूत देकर भिवंडी आक्ट्रायनाका को व्यवसायिक कसाईखाना बताया है | अग्रवाल ने ज्ञापन में कहा है  कि वस्तुओं का पक्का बिल होने के बावजूद बिल की रकम को नजरअंदाज करते हुए चुंगीकर्मी तानाशाही और गुंडागर्दी करते हुए अपना मनमानी भाव तय करके चुंगी वसूलते हैं | ज्ञापन में उन्होंने ठेकेदार कंपनी पर आरोप लगाया है कि उसके इस अवैध चुंगी वसूली में यहाँ के ट्रांसपोर्टरों की भी मिली भगत है | क्योंकि ज्यादा भाव की चुंगी वसूली में कोणार्क कंपनी ट्रांसपोर्टरों को भी हिस्सा देती है | नितेश अग्रवाल ने बतौर सबूत इश्वरी टेक्सटाइल्स, बन्नारी अम्मान टेक्सटाइल्स प्रा.लि. और राजलक्ष्मी काटस्पीन इंडिया प्रा.लि. सहित कई यार्न कंपनियों का पक्का बिल और उसके सामने कोणार्क कंपनी द्वारा मनमानी भाव पकड़कर वसूली गयी चुंगी की बिल प्रस्तुत किया है | जिसमें कोणार्क ने यार्न कंपनियों के बिलों पर साफ़-साफ़ अंकित निश्चित धनराशि से बढ़कर अधिक अपने मनमानी भाव की धनराशि पर चुंगी वसूला है | उन्होंने कहा है कि इससे साबित होता है कि कोणार्क कंपनी ने खुलेआम यहाँ के व्यापारियों से करोड़ों रुपए की लूट की है | बताया जाता है कि राज्य के संवैधानिक पद पर आसीन एनसीपी के एक नेता की भागीदारी और शह पर कोणार्क ये दादागिरी करती है |
     मुख्यमंत्री को भेजे गये ज्ञापन में नितेश अग्रवाल ने कंपनी पर यह भी आरोप लगाया  है कि कोणार्क कंपनी ने चुंगीकर्मी के रूप में सिर्फ गुंडे पाल रखे हैं | जो मनमानी भाव के खिलाफ एतराज करने पर व्यापारियों के साथ गाली-गलौज और मारपीट पर उतारू होने के साथ-साथ पूरी गाडी भी खाली करा लेते हैं | जिसके आतंक से यहाँ का व्यापारी कोणार्क कंपनी का अत्याचार सहन करने पर मजबूर हो जाता है | अग्रवाल ने वर्षों से मनमानी भाव पकड़कर वसूली गई रकम को रिफंड करने की माँग करते हुए मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण  से कोणार्क कंपनी के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई करने की माँग की है | उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यहकोई उनकी अकेली समस्या नही है बल्कि यह पूरे शहर के व्यापारियों की समस्या है | यदि सरकार उन्हें न्याय दिला नही पाती तो उन्हें मजबूरन कोणार्क कंपनी और सरकार दोनों के खिलाफ न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा |                           मुनीर अहमद मोमिन