Friday, January 14, 2011

शीला की चप्पल

............ और जब भाग ली पत्रकार मंडली
 देश में तीसमार खां फिल्म के गाना शीला की जवानी पर प्रिंट मीडिया वालों की खूब कलम घसीटी व इलेक्ट्रानिक मीडिया के गाल बजौव्वल करने वाले पत्रकारों को परसों शीला का एक नया रौद्र रूप देखने को मिला | जब महाराष्ट्र सरकार के शिक्षा विभाग की रिटायर्ड शिक्षाधिकारी शीला तिवारी ने पत्रकारों को चप्पल निकालकर दौड़ा लिया | लेकिन इसके बावजूद 'निर्लज्ज्म सदा सुखी' को चरितार्थ करते हुए इन परम बेहया पत्रकार मंडली ने गाडी में जा बैठे पति- पत्नि से पुनः उनकी प्रतिक्रिया जाननी चाही , तो शीला जी ने दोबारा उनके स्वागत में अपना चप्पल लहराया | जबकि इस दौरान उनके पति रामानन्द तिवारी उन्हें ऐसा न करने के लिए दिल से रोकते दिखाई दिए | यह घटना देखने में भले ही आपको अट-पटी लगे लेकिन मैं शीला तिवारी के इस आचरण से लगभग सहमत सा हूँ | क्योंकि शीला तिवारी नामक यह महिला कोई जाहिल या गवांर नही, बल्कि एक कुलीन घराने से ताल्लुक  रखती हैं | जो शिक्षा विभाग के उपनिदेशक पद से हाल ही में रिटायर्ड हुई हैं | वे उन आईएएस रामानन्द तिवारी की धर्मपत्नी हैं जिन्हें आदर्श बिल्डिंग  घोटाला में लटकाया गया है | चूंकि शीला जी एक सुशिक्षित व संवेदनशील महिला हैं, इसलिए उन्हें इस बात का पूरा भान है कि उनके पति "मीडिया ट्रायल" के शिकार हुए हैं | इसलिए मीडिया वालों पर उनका यह गुस्सा  भले ही असभ्यता की परिधि में आता हो, लेकिन यह एक सहज मानव प्रक्रिया भी है |
रामानंद तिवारी को आदर्श मामले में लपेटने को बेताब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वी बाबा भी तो राज्यसभा के चुनाव के नामांकन के दौरान अपनी संपत्ति के सन्दर्भ में गलत हलफनामा पेश करने के साथ-साथ अति पिछड़े वर्ग के कोटे से दीन-हीन बनकर मुंबई में एक फ़्लैट हथियाया है | मै रामानन्द तिवारी को बहुत करीब से जानता हूँ | लगभग एक दशक तक लगातार राज्य सरकार के सबसे मलाईदार विभाग नगर विकास का सचिव / प्रधान सचिव रह चुकने के बाद उनकी छवि  एक इमानदार नौकरशाह की रही है | लेकिन दुर्भाग्यवश  एक छोटी सी गलती (पुत्रमोह) के कारण उनकी बुढौती खराब हो गयी | रामानन्द तिवारी छोटी मछली थे , जिन्हें फांसना आसान था , और वे फंस भी गए एक अन्य आईएएस  सुभाष लाला के साथ | इसके विपरीत रत्नाकर गायकवाड भी इस मामले में ढंग से हिचकोले खाने के बाद भी प्रमोट  होकर सीधे राज्य के मुख्यसचिव बन गए | अशोक चव्हाण को छोड़कर इस घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री और मंत्री अभी तक गुलछर्रे उड़ा रहे हैं | ऐसे में रामानन्द तिवारी की पत्नी या उनके परिजन 'एकांगी' सोच वाले मीडिया के चिल्लरों का चप्पल से स्वागत करना चाहते हैं तो किसी के लिए चौकाने वाली बात नही होनी चाहिए | 
                                                                      मुनीर अहमद मोमिन       

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