Friday, April 29, 2011

'माया राज' में भी महिलाएं सुरक्षित नहीं !

            उत्तर-प्रदेश सरकार के सारे दावे खोखले 

         राष्ट्रीय महिला आयोग की बात को यदि सच माने तो महिला और दलित महिला उत्पीड़न की घटनाओं में अपना उत्तरप्रदेश अव्वल है | लेकिन बहन मायावती जी की सरकार पिछली सरकार के आंकड़े गिनाकर पिछले चार साल में हुई महिला उत्पीड़न की घटनाओं में कमी आने का दावा कर रही है | लेकिन जमीनी हकीकत तो यह है कि बहन जी के चार साला मुख्यमंत्रित्व काल में महिला उत्पीड़न की घटनाएं कई हजार का आंकडा पार कर चुकी है | यहाँ मैं यह बता देना जरूरी समझता हूँ कि यह आंकड़े विपक्ष के किसी दल या बहन जी के धुर विरोधी मुलायमसिंह यादव के कुनबा या रीता बहुगुणा या उनकी पार्टी कांग्रेस ने नहीं जुटाए हैं | बल्कि यह आंकड़े उत्तरप्रदेश के राज्य सरकार के अपराध अभिलेख ब्यूरो द्वारा जारी किये गए हैं | 
         माया राज में दलित महिलाओं के साथ सबसे ज्यादा बलात्कार की घटनाएं वर्ष २००८ में ३५६ , वर्ष २००९ में २८५ व वर्ष २०१० में २८० दर्ज की गई है | दलितों के अलावा अन्य महिलाओं के साथ बलात्कार की सबसे ज्यादा घटनाएं वर्ष २००९ में हुईं | इस साल १५५२ महिलाएं बलात्कार की शिकार हुईं | जबकि इसके पिछले वर्ष वर्ष २००८ में १६९६ और उसके अगले वर्ष २०१०  में यह आंकडा १२९० था | इसी तरह शीलभंग की सबसे ज्यादा घटनाएँ वर्ष २००८ में ३०२९ हुईं थीं | इसी क्रम में महिलाओं के अपहरण की सबसे ज्यादा घटनाएँ वर्ष २०१० में ४९०३ हुईं थीं | बता दें कि पिछले साल २०४५० कुल महिला उत्पीडन की घटनाएं दर्ज हुईं | मायावती सरकार के सतारूढ़ होने के छः माह बाद वर्ष २००८ में इस तरह के कुल २३३३८ दर्ज किये गए थे | आश्चर्यजनक बात तो यह है कि महिला उत्पीडन की सबसे ज्यादा घटनाएं बहन जी की पार्टी बसपा के गढ़ में ही हुईं हैं | जिसमें कई मामलों में तो बसपा के मंत्री और विधायक ही आरोपी बने हैं | इनमें से कुछ पर कार्रवाई की गाज गिरी | लेकिन जो सरकार और संगठन के लिए ज्यादा उपयोगी थे, उन्हें क्लीन चिट दे दी गई | 
         यह बात कहने में कोई हिचक नहीं है कि महिला मुख्यमंत्री के राज्य में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं | सरकार के तमाम दावों के बावजूद उत्तर-प्रदेश में महिला उत्पीडन की घटनाओं का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है | हाल ही में जिस प्रकार बरेली में एथलेटिक अरुणिमा को चलती ट्रेन से फेंका गया | जिसके कारण उसे अपनी एक टांग गवानी पड़ी | इससे साफ़ है कि दबंगों के आगे क़ानून व्यवस्था की प्राथमिकता बौनी साबित हो रही है | अरुणिमा से पहले भी इस तरह की दर्जनों घटनाओं को अंजाम दिया गया है | लेकिन बहन जी हैं कि अपनी 'राग भैरवी' के आगे किसी की मानने को तैयार ही नहीं हैं | भले सपा, भाजपा और कांग्रेस समेत पूरा विपक्ष विरोध का 'कत्थक' और 'भरतनाट्यम' कर रहा हो |
                                                      मुनीर अहमद मोमिन        

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