यानि बहुत कठिन है डगर पनघट की
कल शनिवार को एक साथ दो महत्वपूर्ण बातें हुईं | एक तरफ जहां लोकपाल विधेयक की ड्राफ्टिंग कमेटी की पहली ही बैठक में वाद-विवाद व बवाल हो गया | वहीं दूसरी और उच्चतम न्यायालय के मुख्यन्यायाधीश एस. एच. कपाडिया ने काले कोट वालों की भी खबर लेते हुए कहा कि काली कोट पहनने वालों की उजली छवि आवश्यक है | इससे भी एक कदम आगे बढ़ते हुए उन्होंने राजनेताओं से भी मुखातिब होकर भ्रष्ट जजों को संरक्षण न देने तक की बात कह डाला |
अब बात पहले लोकपाल पर, लोकपाल विधेयक लाने हेतु बनाई गई ड्राफ्टिंग कमेटी की पहली ही बैठक विवादों के हवाले हो गई | इस विधेयक से भ्रष्ट मंत्रियों और जजों के निलंबन का प्रस्ताव वापस लिया गया है | जबकि सिविल सोसायटी का प्रतिनिधित्व कर रहे अरविंद केजरीवाल ने सरकार के इस बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि सरकार देश के लोगों को गुमराह कर रही है | क्योंकि सिविल सोसायटी ने भ्रष्ट मंत्रियों और जजों के निलम्बन का प्रस्ताव वापस नहीं लिया है | लोकपाल विधेयक का प्रारूप तैयार करने के लिए गठित संयुक्त समिति की पहली बैठक में मसौदों का आदान-प्रदान किया गया | जिसमें अगली बैठक में चर्चा होने की खबर है | समिति के बैठकों की वीडियोग्राफी पर भी सहमति नहीं बन सकी | मगर चर्चाओं की आडिओ रिकार्डिंग करने का फैंसला कर लिया गया | दोनों ही पक्ष चाहते हैं कि एक ठोस लोकपाल विधेयक संसद के मानसून सत्र में पेश किया जाय | इसके लिए समिति की दो मई की होने वाली बैठक में विधेयक का प्रारूप बनाने के तौर- तरीकों पर विचार- विमर्श किया जाएगा | इसके लिए वेब साईट और सीधे सम्पर्क के जरिये विधेयक पर सीधे जनता के सुझाव लेने का फैंसला भी लिया गया | इसके साथ ही नागरिक समाज के विधेयक के मसौदे में तब्दीली करते हुए लोकपाल की नियुक्ति करने वाली समिति में राज्यसभा के सभापति और लोकसभा के अध्यक्ष के बजाए प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता को शामिल किया गया है | सबसे आश्चर्य जनक बात तो यह है कि सरकार का मानना है कि शान्ति भूषण की अध्यक्षता में सिविल सोसायटी के सदस्यों ने जो मसौदा पेश किया वह पहले से तैयार किए गए जन लोकपाल बिल के मुकाबले कमजोर है |
दूसरी और उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एस.एच. कपाडिया ने कहा कि भ्रष्ट न्यायाधीशों को राजनैतिक संरक्षण कत्तई नहीं दिया जाना चाहिए | देश में फैले चहुँ और भ्रष्टाचार के माहौल में अपने घर यानि न्यायपालिका की छवि से चिंतित प्रधान न्यायाधीश श्री कपाडिया ने "काले परिधान में साफ़ लोंगो" की जरूरत पर बल देते हुए राजनीतिक वर्ग से भ्रष्ट जजों को संरक्षण नहीं देने को भी कहा | श्री कपाडिया का यह कहना दिल छू लेने वाला है कि -' हमें उदाहरण पेश करना होगा ताकि न्यायपालिका की स्वतन्त्रता और सत्यनिष्ठा बनी रहे | न्यायधीशों को आत्म-संयम बनाए रखना चाहिए और वकीलों, राजनैतिक दलों, उनके नेताओं या मंत्रियों से तब तक संपर्क नहीं रखना चाहिए, जब तक विशुद्ध रूप से कोई सामाजिक मौक़ा न हो' | श्री कापडिया का कथन निःसंदेह स्वागत योग्य और एक शुभ संकेत है, क्योंकि विगत दिनों से न्यायपालिका का भी नाम गाहे-बगाहे किसी-किसी मामले में संदेह के घेरे में रहा है |
मुनीर अहमद मोमिन
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