Monday, April 11, 2011

कृषि नहीं अब भ्रष्टाचार प्रधान होगा भारत

निजी क्षेत्रों में भाई-भतीजावाद व भ्रष्टाचार का बोलबाला 

         वह दिन ज्यादा दूर नहीं जब कृषि प्रधान कहलाने वाला अपना देश भारत भ्रष्टाचार प्रधान देश कहलाने लगेगा | कम से कम भ्रष्टाचार बाबत हुई एक सर्वे रिपोर्ट से तो यही आशंका बलवती हो रही है | प्रबंध सलाहकार कंपनी (केपीएमजी) द्वारा किए गए सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक़ देश में भ्रष्टाचार निरोधी क़ानून समुचित अमल में न होने, कारोबार में राजनैतिक दखलंदाजी, दोषियों को सजा न मिलने व न्यायिक प्रणाली में विलंब ही देश में बढ़ रहे भ्रष्टाचार के मुख्य कारण हैं | रिपोर्ट में रीयल इस्टेट सेक्टर को सबसे भ्रष्ट माना गया है | जबकि दूर-संचार क्षेत्र दूसरे स्थान पर है | सर्वेक्षण के अनुसार देश में भ्रष्टाचार नियंत्रण में आ जाए तो देश की विकास दर नौ फीसदी से अधिक हो सकती है | 
         अधिकाँश बड़ी कम्पनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और मुख्य वित्त अधिकारियों का मानना है कि आए दिन भ्रष्टाचार के नए-नए मामले सामने आने से पूरी दुनिया में भारत की छवि को नुकसान पहुंच रहा है | इसका नकारात्मक असर भारत के बाज़ार पर भी पड़ रहा है | सर्वे में शामिल ३२ प्रतिशत लोगों ने सबसे भ्रष्ट क्षेत्र के रूप में रीयल इस्टेट का नाम लिया | १७ फीसदी लोगों का मानना है कि टेलीकाम ज्यादा भ्रष्ट है | २-जी घोटाले के बाद टेलीकाम क्षेत्र में भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ था | सर्वे में शिक्षा, गरीबी उन्मूलन को तीसरा सबसे भ्रष्ट क्षेत्र माना गया है | इसी तरह रक्षा को नौ फीसदी, आईटी और बीपीओ को छह फीसदी लोगों ने भ्रष्ट माना | कारपोरेट क्षेत्र भी यह दावा नहीं कर सकते कि वे भ्रष्टाचार से त्रस्त हैं | क्योंकि वे खुद भी इसके लिए जिम्मेदार हैं |
         यहाँ मैं यह बता देना जरूरी समझता हूँ कि अगले वित्तीय वर्ष का बजट पेश करते हुए प्रणव मुखर्जी ने भ्रष्टाचार के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए कहा था कि इस समस्या का सामना करना सरकार की प्राथमिकता होगी | फिर भी इसके संबंध में सरकार की किसी प्रकार की कोई इच्छाशक्ति कहीं नज़र नहीं आई | क्योंकि सर्वेक्षण के दौरान भी लोगों ने साफ़-साफ़ कहा कि ऐसा लगता नहीं कि सरकार भ्रष्टाचार और रिश्वत के बढ़ते मामलों पर रोक लगा पाएगी | जब कारोबारियों से पूछा गया कि अगले दो साल में उन्हें भ्रष्टाचार के मामलों में कमी आती दिखती है या नहीं ? तो ४६ फीसदी लोगों का जवाब था कि भारत में भ्रष्टाचार की स्थिति जल्दी में नहीं सुधरने वाली | अर्थशास्त्रियों का भी मानना है कि जिन देशों में भ्रष्टाचार बढ़ रहा है, वहां दीर्घकालीन निवेश में कमी आ रही है | इससे देश के आर्थिक वातावरण को नुकसान पहुंच रहा है |
                                                मुनीर अहमद मोमिन    

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