रिश्वत देने को कानूनन जायज़ बनाने की तैयारी
हमारे देश में पहले से मौजूद कुछ कानूनी जटिलताओं को हटाकर यदि उन्हें प्रासंगिक और व्यवहारिक बना दिया जाए तो वाकई अपराधों या भ्रष्टाचार पर दबाव या अंकुश लगाया जा सकता है | अक्सर लोग रिश्वत देने की शिकायत इसलिए नहीं करते कि रिश्वत लेना और देना दोनों समान रूप से अपराध है | काम कराना जरूरी है और बिना रिश्वत के काम होना सर्वथा नामुमकिन है | देश का हर सरकारी विभाग रिश्वतखोरी में परम पारंगत हो चुका है | आज हालात ये हैं कि बिना रिश्वत के सरकारी आफिसों में एक पत्ता भी नहीं हिल सकता | आप यह कह ही नहीं सकते कि फलां सरकारी विभाग ठीक है | हर विभाग एक दूसरे से बढ़-चढ़कर भ्रष्ट है | कोई किसी से कम नहीं | बल्कि एक दूसरे से होड़ लगी रहती है कि देखें कौन ज्यादा लूटता है | ऐसे में केन्द्रीय वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार द्वारा एक बहुत ही व्यवहारिक कदम उठाने के संकेत मिले हैं | देश भर में उठे भ्रष्टाचार के भयंकर बवंडर के बीच केन्द्रीय वित्त मंत्रालय ने रिश्वत खोरी पर लगाम लगाने की अनूठी तरकीब इजाद करते हुए इसे बहस के लिए देश के सामने रखा है |
वह तरकीब यह है कि अपना जायज़ या जरूरी काम करवाने के लिए मजबूरन तंग आकर दी जाने वाली रिश्वत को वैध (जायज) घोषित किया जाना चाहिए | भ्रष्टाचार से लड़ने का यह नया हथियार वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार कौसिक बासु ने पेश किया है और इसे सार्वजनिक बहस के लिए वित्त मंत्रालय ने अपनी वेबसाईट पर डाल दिया है | इस बहस पत्र में कौशिक बासु द्वारा रिश्वत को दो खानों में बांटकर अपना जायज काम निकालने के लिए तंग आकर मजबूरन दी जाने वाली रिश्वत को दंड के दायरे से बाहर लाने की दलील दी है | लेकिन इसके साथ-साथ जायज काम के लिए रिश्वत लेने वाले रिश्वतखोरों को दंडित करने का पूर्ववत प्रावधान ज्यों का त्यों बरकरार रखा जाए | इस विचार पत्र में मुख्य आर्थिक सलाहकार ने उदाहरण देते हुए कहा है कि यदि कोई व्यक्ति अपना टैक्स रिफंड लेने के लिए रिश्वत देने के लिए मजबूर हो या रियायत पर आवंटित ज़मीन के दस्तावेज़ को हासिल करने के लिए किसी को रिश्वत देने के लिए बाध्य होना पड़े तो इसे तंग आकर दी गई रिश्वत माना जाए और इसे वैध मानते हुए रिश्वत देने वाले व्यक्ति को दंड के दायरे से बाहर रखा जाए |
भ्रष्टाचार बाबत इस नई और व्यवहारिक पहल के बारे में वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार का मन्तव्य है कि अगर यह कदम उठाया जाए तो रिश्वत देने वाले व्यक्ति रिश्वत लेने वाले को पकड़वाने में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगे | क्योंकि आज की स्थिति में रिश्वत लेना और देना दोनों दंडनीय अपराध है | जिसके कारण रिश्वत देने वाला व्यक्ति अपना मुंह बंद ही रखता है | जो कुछ हो इसे देश के कोने-कोने से उठ रही भ्रष्टाचार के विरोध की आवाज़ का असर माना जाए | या वक्त की नजाकत, दोनों ही परिस्थितियों में सरकार द्वारा उठाए गए एक व्यवहारिक कदम के श्रेणी में इसे रखा जा सकता है |
मुनीर अहमद मोमिन
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