आज भी देश के 88% युवा उच्च शिक्षा से वंचित !
केन्द्रीय लोकसेवा आयोग या UPSC की परीक्षा में देश भर में इस साल कुल 920 छात्र उत्तीर्ण हुए हैं | निश्चय ही ऐसी शिखर परीक्षाओं से IAS, IPS व IFS जैसे उच्च पदों पर कार्य करने के अवसर मिलते हैं | उनसे बड़ी जनसेवा भी हो सकती है | उत्तर-प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती भी कभी IAS बनने का सपना पाल रखी थीं | स्वर्गीय कांशीराम की प्रेरणा से वे राजनीति में आ गईं (जहां IAS उनकी जूतियाँ सीधी करते हैं) | नेता भले ही राजनैतिक नेतृत्व करे मगर प्रशासन ही पूरे सिस्टम को चलाता है | इन अफसरों पर ही पूरा तन्त्र निर्भर करता है | इसलिए सेवाभावी युवाओं द्वारा ऐसी शिखर परीक्षाओं के द्वारा लोकसेवा में प्रवेश करना निश्चय ही देश व समाज के लिए अच्छा है |
लेकिन वास्तविकता इतनी ही नहीं है | एक तो सिर्फ 12% छात्र ही उच्च शिक्षा यानि ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन तक पहुंचते हैं | यानि 88% ऐसे किशोर युवा जो IAS, IPS व IFS बनने की योग्यता रखते हैं, या जो देश सेवा, लोक सेवा प्रशासन के माध्यम से करना चाहते हैं | वे इनसे वंचित रह जाते हैं | यह भयानक व शर्मनाक अन्याय आज़ादी के 63 सालों के बाद भी जारी है | इसलिए जो छात्र या युवा प्रशासन के कुछ पदों पर पहुंचते हैं | उन्हें इस तस्वीर को बदलना चाहिए | यह उनका कर्तव्य भी है और इसके लिए उनके पास अवसर भी होता है | हमारे नेता, विधायक, सांसद व मंत्री कितना जानते हैं | मंत्रियों को उनके विभागों की जानकारियाँ उनके विभागों के IAS अफसर ही देते हैं | इसके बाद भी मंत्रियों तक को अपने काम-काज की ठीक-ठीक मालूमात के लिए वर्षों लग जाते हैं |
राजनेताओं को भी संवैधानिक पद देने से पहले प्रशिक्षण व परीक्षा से गुजरना चाहिए | हमारे देश में इसकी सबसे बड़ी कमी है | यही कारण है कि देश आज भी गरीबी, बेकारी की समस्याओं से जूझ रहा है | जिस देश के 20 करोड़ लोग एक वक्त भोजन करके ज़िन्दगी गुजारते हों और करीब 11 करोड़ युवा बेरोजगार हों वहां महज़ 920 युवाओं के IAS, IPS व IFS आदि सर्वोच्च प्रशासनिक पदों पर पहुंचना कोई गर्व की बात नहीं है | हाल ही में करीब पांच लाख करोड़ रूपए के घोटाले उजागर हुए हैं | कहीं न कहीं इन सब में प्रशासन इन्वाल्व रहता है | यदि ये अफसर या नौकरशाह चाहें तो ऐसे घोटालों को रोक सकते हैं |
हर साल करीब 45 हजार करोड़ रूपए विकास कार्यों में लेट-लतीफी से बर्बाद होते हैं | इन्हें बचाया जाए तो उच्च शिक्षा के क्षेत्र में करोड़ों छात्रों को सहायता दी जा सकती है | भारत में एज्युकेशन लोन अमेरिका से 32 गुना कम छात्र लेते हैं | क्योकि वे या तो इस बारे में जानते ही नहीं या उन्हें चुकाने की क्षमता नहीं रखते | बेहतर हो कि ये शिखर परीक्षाओं में उतीर्ण होकर प्रशासन को संभालने वाले छात्र यह स्थिति बदलें | अगर ये चाहें तो देश की तस्वीर बदल सकती है और हमारे करोड़ों युवाओं को जीने की सही राह भी मिल सकती है |
मुनीर अहमद मोमिन
Apka manana sahi hai munir bhai........
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