Wednesday, May 25, 2011

भारत में भ़ी कौमार्य की खरीद-फरोख्त चालू

  यह संक्रामक रोग देश के लिए कत्तई शुभ संकेत नहीं

         अभी जुमा-जुमा आठ दिन पहले ही तमिलनाडू में जे. जयललिता औए पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के चुन के आने बाद मीडिया से लेकर देश का  तमाम कथित बुद्धिजीवी वर्ग खूब बम-बम था कि देश में पहली बार एक साथ चार-चार मुख्यमंत्री महिला हुई हैं | इसे नारी शक्ति, महिला क्रान्ति, नारी जागरण, उत्थान, चेतना और बदलाव आदि-इत्यादि बताकर इस विषय पर विश्लेष्ण/चर्चा यत्र-तत्र-सर्वत्र चालू था | यह सच है कि आज देश में चार-चार मुख्यमंत्री महिला हैं | इससे पूर्व भ़ी राजस्थान में वसुंधरा राजे सिंधिया और मध्य-प्रदेश में उमा भारती नामक महिला मुख्यमंत्री रह चुकीं है | पूर्व में तो लम्बे अरसे तक एक महिला ही देश की प्रधानमंत्री रहीं है | केंद्र में भ़ी किसी की भ़ी सरकार रही हो हमेशा दर्जन भर महिलाएं मंत्री रहीं हैं | मौजूदा समय में तो देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद राष्ट्रपति से लेकर लोकसभा अध्यक्ष तक महिला हैं | यूपीए की चेयर परसन से लेकर राष्ट्रीय स्तर की अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष से और पीडीएफ जैसी क्षेत्रीय पार्टी की प्रांताध्यक्ष तक महिला है | लेकिन उससे बड़ा सच यह है कि इस दौरान महिला उत्पीडन और अत्याचार, बलात्कार व व्यभिचार का ग्राफ भ़ी तेज़ी से बढ़ा है और दिनों-दिन बढ़ता ही जा रहा है | इससे साबित होता है कि महिलाओं को राजनैतिक अथवा संवैधानिक पदों पर महज़ बैठने या बिठा देने भर से महिलाओं की स्थितियों में सुधारात्मक परिवर्तन मुमकिन नहीं है | कम से कम बेंगलूर से आ रही खबरों के मुताबिक़ तो देश में अब कौमार्य की खरीद-फरोख्त चालू हो गई हो और यह महामारी पूरे देश में तेज़ी से पाँव फैलाती जा रही है | हो सकता है कि इस तरह का कारोबार देश के अन्य हिस्सों में भ़ी धडल्ले से चल रहा हो जो अभी प्रकाश में आने से वंचित हो |          
         देश के आई टी हब के तौर पर मशहूर बेंगलूर का एक घिनौना चेहरा सामने आया है | यहाँ पैसे की कमी के चलते बेटियों की शादी कर पाने में मजबूर माँ-बाप कुंआरी लडकियों को महज़ लाख-डेढ़ लाख में बेच देते हैं | शहर में कुआंरी लडकियों की तलाश तेज़ हो गई है | लेकिन यह दुल्हन बनने के लिए नहीं बल्कि कुछ घंटों की मौज-मस्ती के लिए | इस मामले में अभी तक पुलिस में कोई केस तो दर्ज़ नहीं हुआ है, लेकिन सेक्स वर्करों के लिए काम करने वाले गैर सरकारी  संगठनों ने शहर में तेज़ी से फ़ैल रही इस बीमारी की ओर आगाह किया है | कुंआरी लडकियों पर कुछ घंटों के लिए लाख-डेढ़ लाख रूपए खर्च करना यहाँ के रईस लोगों के लिए कोई मायने नहीं रखता | कौमार्य बेचने का चलन पश्चिमी देशों में एक तरह से आम है | लेकिन दलाल इसे बेंगलूर में भ़ी लोकप्रिय बनाने में जूटे हैं | इस धंधे में लगे दलालों की भ़ी कोई कमी नहीं है | यह ऐसे माँ-बाप की तलाश में रहते हैं | जिनकी बेटी शादी करने के लायक हुई है | और आर्थिक तंगी के चलते इसमें रूकावट आ रही है | ये दलाल ग्राहकों से इन माँ-बाप को मिलवाते हैं और सौदा तय हो जाता है | 
         मैजेस्टिक एरिया में काम करने वाले एक एनजीओ से जुड़े लोगों के मुताबिक़ शहर में कई ऐसी लडकियाँ हैं | जो अपनी माँ-बाप की परेशानी कम करने के लिए बिल्डरों, राजनेताओं या धन्ना सेठों के साथ चंद घंटों के लिए सोने को तैयार हैं | ऐसे में माँ-बाप जिनके पास दहेज़ देने या शादी के खर्च के लिए पैसे नहीं हैं | वे भ़ी अपनी कुआंरी लडकियों को रईसों के साथ सोने के लिए राजी करते हैं | ऐसा केवल बेंगलूर में ही नहीं बल्कि आस-पास के ग्रामीण इलाकों में भ़ी हो रहा है | शहर से सटे ग्रामीण इलाके में हाल ही में ऐसा ही एक मामला सामने आया था | यह माँ-बाप अपनी बेटी की शादी के लिए लाख सुपे जुटा नहीं पा रहे थे | ऐसे में एक दलाल ने लडकी की माँ से संपर्क किया और पैसे जुटाने का उपाय बताया | औरत ने डेढ़ लाख रूपए के लिए अपनी कुआंरी बेटी को हसन नाम के एक शख्स के साथ सोने की इजाजत दे दी | इस मामले में सबसे पहले लडकी का कौमार्य परीक्षण हुआ | फिर तय तारीख पर उस लडकी को उसकी माँ के साथ बेंगलूर से सटे एक रिसोर्ट में लाया गया | जब ग्राहक लडकी के साथ रिसोर्ट के कमरे में गया तो उसकी माँ बाहर बैठकर उसका इंतज़ार कर रही थी | घंटे भर बाद उस शख्स ने लडकी और उसकी माँ को घर भिजवाने का भ़ी प्रबंध किया | 'अस्तित्व'  नामक एनजीओ चलाने वाली एक महिला वकील का कहना है कि अधिकतर मामले में शादी का खर्च जुटाने के लिए माँ-बाप ही खासकर माताएं लडकियों को ऐसा करने के लिए बढ़ावा देती हैं | यह एक गंभीर संक्रामक रोग की तरह है, जो धीर-धीरे पूरे देश में अपना पाँव फैलाते जा रहा है |
                                                            मुनीर अहमद मोमिन
        

No comments:

Post a Comment