दिल टूटने से असीमित पीड़ा : एक वैज्ञानिक शोध
प्यार वो खूबसूरत एहसास है जिसे इन्सान महसूस करना चाहे या न चाहे लेकिन हर किसी की जिन्दगी में एक दौर ऐसा आता है | जब उसे अजीब सी फिलिंग होने लगती है | लेकिन अक्सर वास्तविक जीवन में कई प्रेमी सिर्फ प्रेमी ही रह जाते हैं | वे अपने अहसास अथवा को रिश्ते में नहीं बदल पाते | मतलब शादी के बंधन में नहीं बांध पाते | कितने तो दिल टूटने के चलते बुरी तरह तबाह व बर्बाद हो जाते हैं | इसलिए वैज्ञानिकों का मानना है कि अपने प्रेम को कांच की नाज़ुक चीज की तरह सहेज कर रखिये | क्योंकि अगर यह टूट गया तो बेहिसाब पीड़ा होती है |
अमेरिकी वैज्ञानिकों का दावा है कि दिल टूटने पर चोट लगने के समान ही पीड़ा होती है | लास एंजिलिस स्थित कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, शारीरिक दर्द और सामाजिक वहिष्कार के बीच एक अनुवांशिक सम्बन्ध है | अपने अध्ययन में मानव शरीर में दर्द निवारकों को नियंत्रित करने वाले एक गुणसूत्र के स्तर को मापने वाले वैज्ञानिकों ने पाया कि मानव शरीर मानसिक तनाव के साथ ठीक उसी तरह निपटता है, जैसे वह शारीरिक दर्द के प्रति करता है | इसके लिए वह एक प्राकृतिक दर्द निवारक का स्राव करता है |
वैज्ञानिकों का मानना है कि उनके नतीजों से ज़ाहिर होता है कि दोनों ही स्थितियों में लोगों के अनुभव एक समान होता है | अध्ययन के मुताबिक़ विकास के क्रम में सामाजिक जुड़ाव की व्यवस्था ने सामाजिक सम्बन्धों को बनाए रखने के लिए दर्द की व्यवस्था वास्तव में अपना ली होगी | प्रोफेसर नाओमी ईज़नबर्ज़र के मुताबिक़ शारीरिक दर्द के लिए प्रतिक्रिया करने के लिए ज़िम्मेदार मस्तिष्क का वही हिस्सा सक्रिय होता है जो सामाजिक वहिष्कार के समय सक्रिय होता है | इससे ज़ाहिर होता है कि हमारे मस्तिष्क को भावनाएं वास्तव में चोट पहुंचा सकती हैं |
अध्ययन के तहत वैज्ञानिकों ने १२२ प्रतिभागियों के लार के नमूनों को एकत्र किया ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसमें ओपीआरएम नामक दर्द ज़ाहिर करने वाले गुणसूत्र की कौन सी किस्म मौजूद है | और वे विभिन्न परिस्थितियों में किस प्रकार की प्रतिक्रिया करते हैं | ऐसा पहली बार सम्भव हुआ है, जब यह साबित किया जा सका है कि शारीरिक दर्द में शामिल होने वाले गुणसूत्र सामाजिक वहिष्कार और प्रेम सम्बन्ध टूटने जैसी मानसिक तौर पर दर्द देने वाली परिस्थितियों से जुड़े हैं |
मुनीर अहमद मोमिन
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