Saturday, May 7, 2011

कब मरेगा मंहगाई रूपी लादेन ?

 सरकार और रिजर्व बैंक दोनों जनता को लूटने में जुटे
         आतंकवादी ओसामा बिन लादेन तो मर गया, लेकिन भारत में इन दिनों महंगाई रूपी लादेन का आतंक अपने चरम पर अभी भी बरकरार है | इस लादेनिया महंगाई ने आम जनों को इतना आतंकित कर दिया है कि यह गरीब लोगों को बिना किसी जैविक या प्राण घातक हथियार के ऐसे ही मार डालेगी | कारनामों से तो ऐसा प्रतीत होता है कि केंद्र सरकार व रिजर्व बैंक को जैसे जनता ने चुना व बनाया ही इसलिए हो कि वे जमकर बिना रोक-टोक महगांई बढाते रहें | अब तक का तो लोगों का यही अनुभव रहा है कि इन दोनों का महंगाई बढाना ही एक सूत्रीय कार्यक्रम रह गया है | चूंकि अभी ताज़ा-ताज़ा हुए पांच राज्यों के विधान सभा चुनावों के मद्देनज़र जनता को लालीपाप देकर बेवकूफ बनाना था | इसलिए सोचे समझे प्लान के अनुसार महंगाई को रोकने का खूब ड्रामा किया गया | अब लगभग सारे राज्यों के चुनाव खत्म हो गये हैं और १३ मई को मतगणना भी हो जायेगी | इसलिए आर्थिक भस्मासुर रूपी रिजर्व बैंक ने रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट बढ़ा दिए  | उसके बाद भी आरबीआई के गवर्नर डी. सुब्बाराव ने केवल भारतीय जनता को फरेब में डालने के लिए  दावा किया है कि रिजर्व बैंक महंगाई या मुद्रा स्फीति रोकने हेतु प्रयास कर रहा है | उसके अनुसार विकास दर भले ही नौ प्रतिशत की जगह आठ प्रतिशत हो, महंगाई नहीं बढनी चाहिए | अब  इस दर वृद्धि से गृह व वाहन लोन महंगे होंगे | आईडीबीआई ने तो तुरंत ही ब्याज दरें भी बढ़ा दी |
         इससे अपने घर का सपना और महंगा हो गया है | लगता है कि आरबीआई और केंद्र सरकार दूसरे शब्दों में वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी, योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेकसिंह अहलुवालिया, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और केन्द्रीय कृषि मंत्री शरद पवार आदि की महंगाई बढाओ कार्यक्रम पर अम्ल करने के लिए अघोषित रूप से एक मंडली बन गयी है | जब लोकसभा चुनाव हुए तो महंगाई पर अस्थाई लगाम लगाने के लिए बड़े उपाय करने लगे | फिर चुनाव हो गये और जीत भी मिल गयी | लेकिन महंगाई कम करने का वादा सरकार सिरे से भूल गयी | रिजर्व बैंक ने क्रूड या कच्चे तेल का भाव ११० डालर प्रति बैरल पहुंचने के बहाने पेट्रोल-डीजल का तुरंत मूल्य वृद्धि करने का आदेश दिया है | इसके अनुसार तेल पूल में एक लाख ८० हजार करोड़ रूपये का घाटा होगा | इससे बचने के लिए डीजल में १८ रूपये प्रति लीटर और पेट्रोल में आठ रूपये प्रति लीटर की वृद्धि होगी |  अब यह बताने की बात नहीं है कि इससे ट्रांसपोर्ट चार्ज महंगे होंगे | जिससे सब्जी, फल, अनाज, पर्यटन आदि सब महंगा होगा | यानी जनता जो मंहगाई रूपी आतंकवाद का सामना कर ही रही थी, कि अब उसे मंहगाई के और भयानक हमलों का भी सामना करना होगा | जहां तक पेट्रोल-डीजल के मूल्यों का सवाल है, उस पर टैक्स ही ५०% से ६५% है | 
         यानि इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड आयल ११० डालर प्रति बैरल हो गया है | तो भी टैक्स में ५०% कमी करके जनता को दर वृद्धी से से मुक्ति आसानी से दी जा सकती है | लेकिन सरकार व आरबीआई को जनता नहीं तेल कम्पनियों की चिंता है | जो आश्चर्यजनक रूप से भयानक घाटे के बावजूद नफे में ही रहती हैं | इसका क्या राज़ है यह किसी के भी समझ से सर्वथा परे है | दरअसल सरकार को अपना खजाना भरने और तेल कम्पनियों को खुश रखने के सिवा कुछ नहीं आता | यह जनता की सरकार नहीं बल्कि तेल कम्पनियों और बाजारवादी ताकतों की सरकार है | अब वक्त आ गया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आन्दोलन की तरह मंहगाई के खिलाफ भी जनता को खुलकर एक निर्णायक लड़ाई लड़ना होगी | 
                                                                      मुनीर अहमद मोमिन                  

1 comment:

  1. कब मरेगा मंहगाई रूपी लादेन ?
    सरकार और रिजर्व बैंक दोनों जनता को लूटने में जुटे
    आतंकवादी ओसामा बिन लादेन तो मर गया, लेकिन भारत में इन दिनों महंगाई रूपी लादेन का आतंक अपने चरम पर अभी भी बरकरार है | इस लादेनिया महंगाई ने आम जनों को इतना आतंकित कर दिया है कि यह गरीब लोगों को बिना किसी जैविक या प्राण घातक हथियार के ऐसे ही मार डालेगी | कारनामों से तो ऐसा प्रतीत होता है कि केंद्र सरकार व रिजर्व बैंक को जैसे जनता ने चुना व बनाया ही इसलिए हो कि वे जमकर बिना रोक-टोक महगांई बढाते रहें | अब तक का तो लोगों का यही अनुभव रहा है कि इन दोनों का महंगाई बढाना ही एक सूत्रीय कार्यक्रम रह गया है | चूंकि अभी ताज़ा-ताज़ा हुए पांच राज्यों के विधान सभा चुनावों के मद्देनज़र जनता को लालीपाप देकर बेवकूफ बनाना था | इसलिए सोचे समझे प्लान के अनुसार महंगाई को रोकने का खूब ड्रामा किया गया | अब लगभग सारे राज्यों के चुनाव खत्म हो गये हैं और १३ मई को मतगणना भी हो जायेगी | इसलिए आर्थिक भस्मासुर रूपी रिजर्व बैंक ने रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट बढ़ा दिए | उसके बाद भी आरबीआई के गवर्नर डी. सुब्बाराव ने केवल भारतीय जनता को फरेब में डालने के लिए दावा किया है कि रिजर्व बैंक महंगाई या मुद्रा स्फीति रोकने हेतु प्रयास कर रहा है | उसके अनुसार विकास दर भले ही नौ प्रतिशत की जगह आठ प्रतिशत हो, महंगाई नहीं बढनी चाहिए | अब इस दर वृद्धि से गृह व वाहन लोन महंगे होंगे | आईडीबीआई ने तो तुरंत ही ब्याज दरें भी बढ़ा दी |
    इससे अपने घर का सपना और महंगा हो गया है | लगता है कि आरबीआई और केंद्र सरकार दूसरे शब्दों में वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी, योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेकसिंह अहलुवालिया, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और केन्द्रीय कृषि मंत्री शरद पवार आदि की महंगाई बढाओ कार्यक्रम पर अम्ल करने के लिए अघोषित रूप से एक मंडली बन गयी है | जब लोकसभा चुनाव हुए तो महंगाई पर अस्थाई लगाम लगाने के लिए बड़े उपाय करने लगे | फिर चुनाव हो गये और जीत भी मिल गयी | लेकिन महंगाई कम करने का वादा सरकार सिरे से भूल गयी | रिजर्व बैंक ने क्रूड या कच्चे तेल का भाव ११० डालर प्रति बैरल पहुंचने के बहाने पेट्रोल-डीजल का तुरंत मूल्य वृद्धि करने का आदेश दिया है | इसके अनुसार तेल पूल में एक लाख ८० हजार करोड़ रूपये का घाटा होगा | इससे बचने के लिए डीजल में १८ रूपये प्रति लीटर और पेट्रोल में आठ रूपये प्रति लीटर की वृद्धि होगी | अब यह बताने की बात नहीं है कि इससे ट्रांसपोर्ट चार्ज महंगे होंगे | जिससे सब्जी, फल, अनाज, पर्यटन आदि सब महंगा होगा | यानी जनता जो मंहगाई रूपी आतंकवाद का सामना कर ही रही थी, कि अब उसे मंहगाई के और भयानक हमलों का भी सामना करना होगा | जहां तक पेट्रोल-डीजल के मूल्यों का सवाल है, उस पर टैक्स ही ५०% से ६५% है |
    यानि इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड आयल ११० डालर प्रति बैरल हो गया है | तो भी टैक्स में ५०% कमी करके जनता को दर वृद्धी से से मुक्ति आसानी से दी जा सकती है | लेकिन सरकार व आरबीआई को जनता नहीं तेल कम्पनियों की चिंता है | जो आश्चर्यजनक रूप से भयानक घाटे के बावजूद नफे में ही रहती हैं | इसका क्या राज़ है यह किसी के भी समझ से सर्वथा परे है | दरअसल सरकार को अपना खजाना भरने और तेल कम्पनियों को खुश रखने के सिवा कुछ नहीं आता | यह जनता की सरकार नहीं बल्कि तेल कम्पनियों और बाजारवादी ताकतों की सरकार है | अब वक्त आ गया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आन्दोलन की तरह मंहगाई के खिलाफ भी जनता को खुलकर एक निर्णायक लड़ाई लड़ना होगी |
    मुनीर अहमद मोमिन

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