संगीन साबित हो रहीं है फोन की रंगीन बातें
आखिर प्राइवेसी के नाम पर रतन टाटा ने अपनी प्राइवेसी अथवा निजता को लेकर सुप्रीमकोर्ट में ठीक उसी तरह की याचिका दायर कर दी है | जैसी याचिका कुछ वर्ष पूर्व बड़े भैया अमिताभ बच्चन के छोटे भैया अमर सिंह और विपाशा वसु जैसी लज्जाशील अभिनेत्रियों के बीच इलू-इलू अथवा रंगीन अथवा संगीन टेलीफोन वार्ता के टेप को सार्वजनिक करने के खिलाफ स्थगन आदेश मांगने के लिए दायर की थी, और माननीय सुप्रीमकोर्ट ने राजेश खन्ना की पूर्व महिला सखा पहले की टीना मुनीम और अबकी टीना अंबानी के पति अनिल अंबानी के लंगोटिया यार परमादरणीय अमर सिंह जी की गुहार को उचित मानते हुए उक्त टेप वार्ता को सार्वजनिक करने या छपने-छपाने पर रोक लगा दी थी | जबकि उक्त टेप वार्ता के कुछ मजेदार अंश टाइम्स समूह सहित हिन्दी और अन्य भाषाई कई अखबारों में छप-छपा चुके थे | इन दिनों नीरा राडिया और रतन टाटा के "बीच" की फोन वार्ता देश में चटखारे बहस का विषय बना हुआ है | नैनो वाले टाटा के उद्योग समूह की नैना बनी राडिया से हुई बात- चीत को टाटा अपनी प्राइवेसी या निजता मानते हुए उसे लीक करने से काफी भन्नाए हुए हैं | और इस कृत्य को वे भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त अपनी निजता के अधिकार का हनन मान रहे हैं | वैसे इस देश में निजता हमेशा बड़े लोगों की ही होती है, और यह निजता इतनी बड़ी होती है कि, इसे ढकने के लिए बड़े-बड़े कनात ( तंबू ) भी छोटे पड़ जाते हैं | जिससे इनकी निजता इधर-उधर, दाएं-बाएं या आगे-पीछे यानि कहीं न कहीं से दिखने ही लगती है | हालांकि गुलछर्रे उड़ाते हुए रंगीनी में सराबोर होकर फोन पर चल छैंयां-छैंया, छैंया-छैंया.........करते समय किसी को भी अपनी निजता का लेश मात्र भी ध्यान नही रहता | वह तो निजता की जवानी तब उफान पर आती है | जब निजता की बात सार्वजनिक होने लगती है | और उस कथित निजता वाले की छवि समाज में धूल- धुसरित होने का खतरा पैदा होने का अंदेशा हो जाता है |
इधर मीडिया ने भी नीरा राडिया से अपनी वफादारी साबित करते हुए कड़ी मेहनत के बाद उसके लिए "दलाल" के बदले "लाबीस्ट" नामक शब्द खोज निकला है | धन्य हो मीडिया माता की |
मुनीर अहमद मोमिन
GOOD
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