ये कैसा दौर आज - कल आ गया है |
भ्रष्टाचार चहुँ ओर छा गया है ||
कहीं टू जी, कहीं आदर्श बनकर |
मंत्री, मुख्यमंत्री तक खा गया है ||
कभी नैनो वाले टाटा की नैना बनकर |
सुप्रीमकोर्ट तक उन्हें दौड़ा गया है ||
क्या मीडिया और क्या सरकारी तंत्र |
करप्सन का बदबू सब में आ गया है ||
सेक्स स्कैंडल का कभी चोला बदलकर |
कितने आईएएस, आईपीएस तक पचा गया है ||
रिश्वत का असर सब पर है " मोमिन " |
जिसे देखो वही बौरा गया है ||
vry true.
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