Tuesday, December 7, 2010

अशोक को शोकग्रस्त करने की सुपारी

      लोगों का चीरहरण करके कचूमर निकालने  वाली मीडिया पर भी अब पलट वार होने शुरू हो गए है | और मीडिया की स्वतन्त्रता के नाम पर की जा रही उदंडता पर खुद मीडिया के  प्रबुद्ध जनों द्वारा इस तरह की नकेल की आवश्यकता कभी से  महसूस की जाती रही है | 
       अपने गृहनगर नांदेड में महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने मुख्यमंत्री से पैदल होने का नारियल मीडिया के सर पर फोड़ते हुए कहा है कि उन्हें पदच्यूत कराने के लिए महाराष्ट्र कांग्रेस के एक बड़े नेता ( केन्द्रीय मंत्री ) ने मीडिया को सुपारी दिया था, और इस तरह मीडिया ने उक्त नेता से सुपारी लेकर मेरा गेम बजा दिया | अशोक चव्हाण का खुला आरोप है कि - 
                     मुझे तो लूट लिया , मिलके मीडिया वालों ने |
                        हाई  कमान वालों ने , सत्ता  के दलालों  ने ||   
 इस ब्लॉग पर मै पहले भी  लिख चुका हूँ कि दस जनपथ में गहरी पैठ रखने वाले एक नेता के मुंबई स्थित एक हमराज- हमकाज बिल्डर  से और अशोक चव्हाण के नाक के  बाल बने  एक बिल्डर से एक प्रोजेक्ट को लेकर तनातनी हो गयी | इसकी भनक महाराष्ट्र के एक केन्द्रीय मंत्री को लगते ही उसने दस जनपथ के गुरु घंटाल से अशोक चव्हाण की पटेलगिरी  करवा दी | दिल्ली के नेता के इशारे पर महाराष्ट्र वाले नेता ने मीडिया को सुपारी देकर 'आदर्श" गेम प्लांट  करवा दिया | आदर्श के चक्कर में अशोक चव्हाण सामान्य हो गए | लकडाबाज की लकड़ीबाजी  से चव्हाण की मुख्यमंत्री पद की वैशाखी  खिसक गयी | अब लगता है कि अशोक चव्हाण दो-दो हाथ करने के मूड में उतर आयें हैं | इसलिए उन्होंने खुलकर एलान- ए-अशोक कर दिया है कि मुझे शोक में डालने की सुपारी मीडिया ने ली थी | पहले अन्डरवर्ल्ड  में ही सुपारी लेने-देने  का चलन था | लेकिन अब मीडिया के पहलवान भी सुपारी लेने लगे हैं | हत्याएं दोनों ही जगह होती है | अंडरवर्ल्ड वाले जान  की हत्या करके  सीधे  'खुदागंज ' का टिकट कटा देते हैं | और मीडिया वाले चारित्रिक हत्या करके पद-प्रतिष्ठा का स्वयं पोस्ट -मार्टम कर देते हैं | 
                                                                                   मुनीर अहमद मोमिन      

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