किन अदृश्य शक्तियों के नियंत्रण में है मीडिया ?
इंडियन एक्सप्रेस समूह के मुंबई से प्रकाशित मराठी दैनिक लोकसत्ता के कार्यकारी संपादक गिरीश कुबेर ने पत्रकारों को भी सूचना के अधिकार के परिधि में लाने की बात कहकर मीडिया जगत में एक बहस का नया मुद्दा छेड़ दिया है | एक सार्वजनिक कार्यक्रम में श्री कुबेर ने जमकर मीडिया की ऐसी-तैसी कर दी | जिससे 'पत्रकारनुमा दलालों' और 'दलालनुमा' पत्रकारों के बीच खदबदाहट मच गयी है | अपनी विकलांग/एकांग वैचारिक सोचों को लोगों पर जबरन थोपने वाले मीडिया के महारथी आखिर अपने गिरेबान में कब झाकेंगे ? विभिन्न राजनैतिक पार्टियों और कार्पोरेट सेक्टर के असरदारों के पे-रोल पर काम करने वाले 'धंधेबाज पत्रकार' सुपारी लेकर या तो किसी की राजनैतिक/सामाजिक हत्या कर देते हैं या चीरहरण | सच तो यह है कि मीडिया कंपनियों में रखैल सरीखा भूमिका अदा करने वाले पत्रकारों को कार्पोरेट सेक्टर और बाज़ार के धन्नासेठ पूरी तरह नियंत्रित कर रहे हैं |
मै यह नही कहता कि यह हालत किसी विशेष शहर या देश की है | बल्कि विश्व स्तर पर पत्रकारिता स्तरहीन और चरित्रहीन हुई है | नही तो अदना विकिलिक्स जैसा इंटरनेट माध्यम विश्व के सबसे उदंड और जगत दादा अमेरिका सहित अनेक देशों की राजनैतिक चूलें हिला सकता है | तो इतनी बड़ी लहीम-सहीम मीडिया क्यों नही ? राडिया टेप पिछले लगभग दस माह से कई मीडिया स्टेशनों से गुजरा | लेकिन किसी ने उस पर तवज्जो नहीं दी | एक पत्रिका में उसके कुछ अंश छपने के बाद ही मीडिया जगत सियारों की तरह हुआं-हुआं करने लगा | कृषि एवं गाँव प्रधान भारत की मीडिया विश्व सुंदरियों, नचनियों/गवइयों (फिल्म जगत ) और क्रिकेट आदि में ही आखिर क्यों अपनी पूरी ऊर्जा खपा दे रही है | आज खेती/खेतिहर और गंवई सरोकार वाली पत्रकारिता कितनी फीसदी हो रही है ? इतना ही नही आज कल खबरों से 'तटस्थता' क्यों लुप्त हो गई है ? महाराष्ट्र का आदर्श घोटाला उसी वक्त बाहर क्यों आया जब दो बड़े ठेकेदारों के बीच तना-तनी हुई | जिसमें एक वर्तमान मुख्यमंत्री का ख़ास था तो दूसरा पूर्व का | फिर पूर्व मुख्यमंत्री ने मीडिया में 'आदर्श' सुपारी देकर वर्तमान मुख्यमंत्री को भी पूर्व बना दिया | इसका खुलासा खुद वर्तमान से पूर्व बने मुख्यमंत्री ने एक सार्वजनिक सभा में डंके की चोट पर किया | आज मीडिया को दूसरों पर चर्चा-परिचर्चा, संवाद-परिसंवाद करने/करवाने से पहले, अपने स्वयं के आत्ममंथन और आत्मचिंतन की घोर आवश्यकता है | क्योंकि आज कल "पेड न्यूज" का 'कैंसर' पत्रकारिता की विश्वासनीयता और आचरण को पूरी तरह लीलता जा रहा है | हो सकता है कि, बहुत सारे या सारे के सारे लोग मेरे विचारों से असहमत हों | लेकिन मुझे भी पत्रकारिता का कमोबेश तीस वर्षों का तजुर्बा है | किसी को बुरा लगे या भला | लेकिन -
मै आईना हूँ दिखाऊँगा दाग चेहरे का,
जिसे पसंद न हो सामने से हट जाए |
मुनीर अहमद मोमिन
yes, media is corrupt.only masala khabren.
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