Sunday, March 27, 2011

ढीला होता जा रहा है शादी नामक गाँठ का बंधन

चट-मंगनी, पट-विवाह, झट-तलाक  
 आज के आधुनिक और भौतिकवादी दौर में प्रेम विवाह के चलन का ग्राफ लगातार आसमान छूता जा रहा है | हमारा समाज आगे बढ़ रहा है, यह एक अच्छी पहल है |  लेकिन इसके साथ ही साथ समाज में अनेकानेक बुराइयां भी पनप रही हैं | जिससे  हमारे देश की सभ्यता व संस्कृति दिनों-दिन रसातल की ओर भी जा रही है | लोगों का अब विवाह जैसे पवित्र रिश्ते से विश्वास उठता जा रहा है | शादी या प्यार जो कभी दो दिलों का अटूट बंधन कहलाता था | इसका स्थान महज मौज-मस्ती लेता जा रहा है | कुल मिलाकर समाज में परंपरा व पारिवारिक संस्था के टूटने का असर शादी नाम संस्था को तेजी से कमजोर कर रहा है | ग्लोबल स्तर पर अब लोग ऐसे बंधन व दबावों को मानने के लिए तैयार नहीं हैं | जिन्हें समाज ने उन पर मढ़ दिया हो | व्यवसायिक, जीवन मूल्य, शिक्षा, जॉब के अवसर और महिलाओं की बदलती प्राथमिकताएं धीरे-धीरे सात फेरों के सनातन "कंसेप्ट" को धुंधला कर रहीं है | 
     नेशनल स्टेटिक्स के आंकड़ों के अनुसार अमेरिका व इंग्लैंड में बच्चे पैदा करने के लिए शादी गैर जरूरी है | इस तरह अमेरिका में बिना शादी के पैदा होने वाले बच्चों की संख्या ४२ प्रतिशत है | जबकि यूके में बिना विवाह के पैदा होने वाले बच्चों की संख्या तकरीबन आधा है | इस तरह पारंपरिक परिवार व्यवस्था के टूटने से शादी के बिना बच्चे पैदा होने का चलन बढ़ा है | जिसके फलस्वरूप ऐसे बच्चे तरह-तरह के कष्ट झेलने को मजबूर हो रहे हैं, जिनके माता-पिता उन्हें शादी से पहले दुनिया में लाये | आंकड़े के मुताबिक़ यूके में १९७६ के दौरान अवैध बच्चे समाज में 'टैबू' माने जाते थे | उस समय नौ प्रतिशत बच्चे शादी के बिना पैदा होते थे | अब उनकी संखा बढ़कर ४६ प्रतिशत हो गयी है |
     इसी तरह अमेरिका में जब लिंडन जानसन ने "वार ऑफ़ पावर्टी" को लांच किया था | तब वहां ९३ प्रतिशत बच्चे शादी-शुदा माँ-बाप से पैदा हुए थे | वहीं २००९ तक यह आंकडा गिरकर ५८ प्रतिशत हो गया है | हालांकि यह पाया गया है कि शादी रूपी "फैमिली सेट-अप" के बिना जिन बच्चों की परवरिश हो रही है, वे ज्यादा कष्ट झेल रहे हैं | लेकिन शादी के बिना माँ बनना कई महिलाओं की जिन्दगी में मील का पत्थर साबित हुआ है | यूके में जहाँ शादी की औसत उम्र ३३.८ हो गयी है | वहीं बच्चा पैदा करने की औसत उम्र २९.४ है | 
    'लिव इन रिलेशन' में ही बच्चे पैदा करने का 'ट्रेंड' अब भारत में भी दिखाई देने लगा है | यहाँ के मनोचिकित्सकों व समाजशास्त्रियों का मानना है कि अब भारत में भी ४०वां व ५०वां वसंत देख चुकी महिलाएं भी अपनी भावनात्मक, शारीरिक और सामाजिक जरूरतों को पूरा करने के लिए शादी के फैंसले ले रही हैं | अगर इन्हें इनकी पसंद का साथी मिलता है, तो वे न तो उम्र की परवाह कर रही हैं और न ही समाज का कोई डर उन्हें सता रहा है | इसके अलावा भी कुछ लोग जीवन में व्याप्त बोरियत को मिटाने के लिए या कुछ नया व 'एक्साइटिंग' करने के लिए भी 'इलू-इलू' का 'गेम प्लान' कर रहे हैं  |
                                                                                                       मुनीर अहमद मोमिन 
                                                                                                                                                                                                                          

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