Tuesday, February 1, 2011

जियो बहादुर पुलिस कमिश्नर

                              एसपीएस का गौरवपूर्ण कार्यकाल
     प्रशासनिक सेवा के अंतिम समय में किसी आईएएस अथवा आईपीएस अधिकारी को क्रीम पोस्टिंग मिले और वह उसका लाभ न उठाए ? ऐसा आज के भ्रष्टाचारी युग में संभव नही, परंतु इस संभावना को महाराष्ट्र कैडर के एक आईपीएस अधिकारी ने धता बताते हुए एक ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया है जिसे अन्य अधिकारियों को आत्मसात करने की आवश्यकता है | असंभव को संभव बनाने वाले इस  आईपीएस अधिकारी का नाम है शिवप्रताप सिंह यादव , जिन्हें एसपीएस यादव के नाम से जाना जाता है | पुलिस प्रशासनिक सेवा समाप्ति से ठीक पाँच महीने पूर्व उन्हें मुंबई से सटे ठाणे शहर पुलिस आयुक्तालय का आयुक्त पद मिला | लोगों में चर्चा थी कि कार्यकाल के अंतिम पाँच महीनों में आयुक्त पद  पर आए एसपीएस यादव अन्य अधिकारियों की तरह अपने इस कार्यकाल का भरपूर उपयोग करेंगे  परंतु लोगों की  इन अटकलों पर यादव ने अपनी पूर्ण ईमानदारी और कर्तव्य दक्षता से पूर्ण विराम लगा दिया  |
  ठाणे पुलिस आयुक्त का पदभार संभालते ही एसपीएस यादव ने जब अवैध धंधों पर हमला बोला तब चर्चा हुई कि यह परंपरा के अनुसार हफ्ते बढाने की एक तकनीक है | परंतु लोगों की यह आशंका उस समय धराशाई हो गई जब ठाणे पुलिस आयुक्तालय के ह्फ्तेबाज ६८ पुलिस अधिकारियों का एक साथ तबादले का आदेश जारी हुआ | अवैध धंधेबाज ही नहीं पुलिस प्रशासन और दलालों में भी हडकंप मच गया | यही नहीं पुलिस प्रशासन का सिरदर्द बन रही सिक्युरिटी एजेंसियों, पर्यावरण नियमों का उलंघन करने वाले मल्टीप्लेक्सों सहित नो पार्किंग जोन का आदि उल्लंघन करने वालों पर भी एसपीएस यादव का डंडा ऐसा चला कि लोगो की बोलती बंद हो गई |
    वर्ष १९७७ बैच के आईपीएस अधिकारी एसपीएस यादव ने अपने ३२ वर्षों के कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां बखूबी निभाई हैं | महाराष्ट्र पुलिस में वे अपने स्वच्छ एवं आक्रामक तेवर के लिय भी जाने जाते है | राज्य सीआईडी के अतिरिक्त आईजी, नागपुर और औरंगाबाद पुलिस आयुक्त, एयर इंडिया और रेलवे के सतर्कता अधिकारी , मुंबई ट्रैफिक पुलिस दल के प्रभारी , क्राइम ब्रांच के अतिरिक्त आयुक्त तथा जालना और कोल्हापुर के पुलिस अधीक्षक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर एसपीएस यादव ने जिस स्वच्छ छवि के साथ कार्य करने का उदाहरण पेश किया है उसे महाराष्ट्र पुलिस हमेशा याद रखेगी | ३१ जनवरी २०११ को एसपीएस यादव पुलिस प्रशासनिक सेवा से  निवृत हो गए  | परंतु उनके साहसी और स्वच्छ चरित्र को महाराष्ट्र की जनता हमेशा याद रखेगी |
  क़ानून को ताक पर रखकर अवैध तरीके से धन वैभव जुटाने वाले , गुंडे एवं माफिया क़ानून का सम्मान करेगे ऐसी आपेक्षा करना गलत है | बावजूद इसके सरकारी तंत्र लोगों  के सामने अपने कार्यों का आदर्श स्थापित कर सकता है जो उसके हाथ में है ऐसी धारणा एसपीएस यादव की शुरू से रही है है | ठाणे पुलिस आयुक्त पद पर आते ही उन्होंने कई महत्वपूर्ण कदम उठाये | महिलाओं को न्याय मिले इसके लिए महिला पुलिस का अलग दल बनाया | लोगों  की शिकायते आसानी से दर्ज हो सके इसके लिए हर पुलिस थानों में पहली बार जनसम्पर्क अधिकारी नियुक्त किए गये | वर्ष २०१० के समापन और वर्ष २०११ के प्रारंभ काल को उन्होंने सड़क सुरक्षा सप्ताह के लिए चुना तथा इसके जरिये ट्रैफिक नियमों का पालन करने का जनजागृत अभियान चलाया जिसका लाभ ठाणेवासियों को लंबे समय तक मिलता रहेगा |
   
                                                            मुनीर अहमद मोमिन        
    

1 comment:

  1. Vo kehte hain na ki keecher mai kamal ka hona,khushnasibi hai ji ki koi mil gaya galti se, nahi toh sari police b hamari ministers ki tarah hoti hai ji, kehti kuch hai, batati kuch hai, kerti kuch hai aur karvaati b bhut kuch hai.Jitni tareef karoon todi hai ji.Ab toh alfaaz hi nahi milte.

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