Friday, February 4, 2011

बेलगाम महगाई का जिम्मेदार कौन ?

    मंत्रियों के बचकाने बयान से आम जन हैरान 
 "लोगों की आमदनी बढ़ने से महंगाई बढी है |सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन से आम आदमी खासतौर पर गरीब आदमी की जेब में अच्छा खासा पैसा आया है | जिससे उसकी खरीदने की क्षमता  बढ़ी है | इसी वजह से आवश्यक वस्तुओं  के दाम बढ़ें हैं "| यह अजीबो-गरीब बयान है देश के अर्थ शास्त्री प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का , वहीं दूसरी ओर प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि हमारे पास जादू की कोई छड़ी नहीं है | जिससे हम महंगाई पर कंट्रोल पा सकें | जिस देश के प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री का बयान इतना गैरजिम्मेदाराना हो उस देश की जनता को भगवान के भरोसे भी नहीं छोड़ा जा सकता | इस समय जबकि महंगाई से देश भर में हाहाकार मचा है | महंगाई कम करने के अब तक के सारे सरकारी वादे खोखले साबित हुए हैं | वहीं प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने पता नहीं किस अर्थशास्त्री गणित के हिसाब से महंगाई का ठीकरा गरीब आदमी के सिर पर ही फोड़ डाला और उस गरीब आदमी को महंगाई का जिम्मेदार ठहरा दिया | जो बढ़ती महंगाई के चक्कर में स्वंय बुरी तरह से पिस रहा है | मनमोहनी गणित के मुताबिक़ लोगों की आमदनी में इजाफा होने से दूध- सब्जी और अनाज की मांग में बढ़ोत्तरी हुई है और यही महंगाई बढ़ने की मुख्य वजह है | अपनी पीठ स्वंय थपथपाते हुए प्रधानमंत्री ने यह  भी कहा है कि सरकार की सामाजिक सुधारों वाली योजनाओं की बदौलत गरीब लोगों के हाथ में पैसा आया है और वे लोग खर्च कर रहे हैं | ऐसे में मंहगाई बढना लाजिमी हैं | गनीमत की बात यह है कि महंगाई के साथ -साथ प्रधानमंत्री को भ्रष्टाचार भी याद है | इस लिए उन्होंने भ्रष्टाचार पर भी निशाना साधते हुए अपने बूढ़े मन की भड़ास निकालते हुए कहा कि भ्रष्टाचार सरकार और प्रशासन की  जड़ो   को खोखला कर रहा है | भ्रष्टाचार के कारण हमारी अंतर्राष्ट्रीय छवि भी मलीन हो रही है | प्रधानमंत्री ने लगातार सिर उठा रही महंगाई को आर्थिक विकास के लिए गंभीर खतरा बतातें हुए इस पर काबू पाने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने की बात कही है | लेकिन यह प्रभावी कदम कौन उठाएगा ? जनता  या सरकार यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है | दिल्ली में राज्यों के मुख्य सचिवों को संबोधित करते हुए मनमोहन सिंह ने कहा कि खाद्य मुद्रा स्फीति बढ़ने के पीछे कमजोर आपूर्ति व्यवस्था की बड़ी भूमिका हैं | जनवितरण प्रणाली को मजबूत बनाकर ही इस समस्या से निपटा जा सकता है | महंगाई से भविष्य में आर्थिक विकास की तमाम योजनायें प्रभावित हो सकती हैं | इस लिए इससे निपटने के लिए आपात उपाय करने होंगे | हालांकि प्रधानमंत्री का यह बयान सरकार की ओर से अपनाई गई अब तक की तमाम जन नीतियों से मेल नहीं खाता | जिसमें महंगाई के बजाय आर्थिक विकास को तरजीह मिलती रही हैं | कुल मिलाकर मंहगाई पर जब सरकार स्वंय दिग्भ्रमित है, ऐसे में जनता को सरकार से किसी तरह की रियायत की उम्मीद रखना सरासर बेमानी है |
                                                                       मुनीर अहमद मोमिन        

1 comment:

  1. there should b some education qualification & age limit necessary 2 b a prime minister.jab b koi old age p.m. ya president banata hai, ya toh vo operation foreign se karane chala jaata hai ya phir apni body ka koi part dalwata hai. uske seat per aane ke yahi faide hain.agar kahin foreign mai jaata hai toh pehle hi usko seat offer ker dete hain kahin budda ya buddia vohi na mar jaaye.at least body toh fit honi chahiye,kahi aur itne budde ministers dekhe hain. ram-2 karne ki umar main , i mean kabar mai pair hote hain aur p.m. bane hue hote hain. mahingayi ko rokna toh kya yeh kaiyon ko toh theek se iske spelling b nahi aate honge.

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